Sadhana: गुज़रे ज़माने की बेहद शानदार अभिनेत्री जिसका आखिरी वक्त मुश्किलों में बीता

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Photo: Social Media

Sadhana. बरेली के बाज़ार में झुमका गिराने वाली इस अभिनेत्री को ज़्यादातर लोग अब भुला चुके हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब साधना की फिल्म का इंतज़ार लोग बड़ी बेसब्री से किया करते थे।

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इनका हेयरस्टाइल इतना मशहूर था कि भारत की लगभग हर लड़की एक दौर में इनके जैसा हेयरस्टाइल लेना चाहती थी, जिसे कहा जाता था साधना कट। लंबे वक्त तक ये बॉलीवुड की सबसे महंगी अभिनेत्री बनी रहीं। और महज़ कुछ फिल्मों में काम करने के बावजूद भी इनका स्टारडम किसी भी दूसरी एक्ट्रेस से कम नहीं रहा।

Modern Kabootar आज लेकर आया है गुज़रे ज़माने की सुपरस्टार अभिनेत्री Sadhana की कहानी। अपनी पहली ही फिल्म से सफलता हासिल करने वाली Sadhana फिल्मों में कैसे आई और क्यों उन्होंने इतनी कम फिल्मों में काम किया, आज यही कहानी हम और आप जानेंगे।

Sadhana का शुरूआती जीवन

2 सितंबर 1941 को साधना का जन्म हुआ था कराची में। चूंकि इनके पिता उस दौर की मशहूर अभिनेत्री व डांसर साधना बोस को बेहद पसंद करते थे, सो उन्हीं के नाम पर उन्होंने अपनी बेटी का नाम साधना रखा था।

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देश जब आज़ाद हुआ तो बंटवारे का दर्द भी आज़ादी के साथ मिला। नन्हीं साधना ने भी बंटवारे का वो दंश देखा और इनका परिवार भी कराची छोड़कर मुंबई आने पर मजबूर हुआ।

इस फिल्म में मिला पहली दफा Sadhana को मौका

मुंबई आने के बाद साधना के पिता ने अपनी बेटी को फिल्मों में काम दिलाने के लिए मेहनत करना शुरू कर दिया। इनके पिता जानते थे कि उनकी बेटी भी बचपन से ही फिल्मों और फिल्म अभिनेत्रियों के प्रति काफी आकर्षित होती है, सो उन्हें यकीन था कि साधना को तो फिल्मों में काम मिल ही जाएगा।

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पिता की मेहनत रंग लाई और साल 1955 में रिलीज़ हुई फिल्म श्री 420 में इन्हें इचक दाना बीचक दाना गाने में बतौर कोरस गर्ल काम मिल गया। इस समय इनकी उम्र 15 साल थी। ये रोल इतना छोटा था कि किसी ने भी साधना को नोटिस नहीं किया।

ऐसे बदलनी शुरू हुई Sadhana की किस्मत

लेकिन इसके बाद साधना ने अपने कॉलेज में होने वाले नाटकों में काम करना भी शुरू कर दिया था। नाटकों में साधना इतना शानदार अभिनय करती थी कि हर कोई इनका मुरीद हो जाता था। कॉलेज के एक नाटक के दौरान ही एक फिल्म प्रोड्यूसर की नज़र इन पर पड़ी।

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उस प्रोड्यूसर को इनका काम बेहद पसंद आया और उसने इन्हें दुनिया की सबसे पहली सिंधी फिल्म अबाना में कास्ट कर लिया। उस फिल्म के प्रचार का काम चल रहा था और इनकी एक तस्वीर स्क्रीन नाम की उस दौर की एक लोकप्रिय मैगज़ीन में छपी।

ये थी Sadhana की पहली हिंदी फिल्म

इत्तेफाक से वो तस्वीर उस ज़माने के ज़बरदस्त प्रोड्यूसर सशाधर मुखर्जी ने भी देखी। सशाधर मुखर्जी ने इन्हें फिल्मालय प्रोडक्शन में बुलाया और उन्होंने साधना को फिल्म लव इन शिमला में कास्ट कर लिया। इस फिल्म में हीरो थे जॉय मुखर्जी जो कि सशाधर मुखर्जी के बेटे थे और जॉय मुखर्जी की भी ये पहली फिल्म थी।

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इस फिल्म के डायरेक्टर थे आर.के.नैय्यर साहब, जिनसे आगे चलकर साधना ने शादी कर ली थी। करियर की पहली ही फिल्म सुपरहिट साबित हुई और देखते ही देखते रातों-रात साधना एक आम लड़की से सुपरस्टार बन गई।

और कामयाब होती चली गई Sadhana

पहली फिल्म से मिली कामयाबी के बाद साधना ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इनकी दूसरी फिल्म थी परख जो कि बिमल रॉय ने बनाई थी। ये फिल्म भी ज़बरदस्त हिट रही और साधना ने इस फिल्म में भी दमदार काम किया।

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फिर अगले साल यानि 1961 में ये नज़र आई देवानंद के साथ फिल्म हम दोनों में। ये फिल्म भी बड़ी हिट रही थी। इसके बाद शशि कपूर के साथ प्रेम पत्र में भी इनकी जोड़ी को लोगों ने काफी पसंद किया। फिर किशोर कुमार जी के साथ मन मौजी फिल्म में भी इन्होंने बड़ा बढ़िया काम किया।

मेरे महबूब में भी किया कमाल

तरक्की की राह पर हर दिन तेज़ी से आगे बढ़ रही साधना ने लव इन शिमला के दो सालों के बाद यानि 1962 में एक बार फिर से जॉय मुखर्जी के साथ काम किया फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना में। ये फिल्म लव इन शिमला जितनी कामयाब तो नहीं रही, लेकिन फिल्म में साधना का काम लोगों को पसंद ज़रूर आया। अगले साल ये राजेंद्र कुमार के साथ फिल्म मेरे महबूब में दिखी और इस फिल्म में भी इन्होंने कमाल का काम किया।

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Sadhana के काम आई ऋषिकेश मुखर्जी की सलाह

साधना की फिल्म मेरे महबूब के साथ तो एक बड़ा ही दिलचस्प किस्सा भी जुड़ा है। दरअसल, जब ये फिल्म इन्हें ऑफर की गई थी तो पहले इन्होंने ये फिल्म करने से साफ इन्कार कर दिया था। उसके बाद ये उस दौर के मशहूर डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी से एक दिन मिली और इन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी को बताया कि इन्हें मेरे महबूब फिल्म का ऑफर आया था।

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लेकिन इन्हें वो ऑफर कुछ खास नहीं लगा और इसलिए इन्होंने वो फिल्म करने से इन्कार कर दिया है। इस पर ऋषि दा ने इनसे पूछा कि फिल्म का हीरो कौन है। जब साधना ने बताया कि फिल्म का हीरो राजेंद्र कुमार है तो ऋषि दा इनसे बोले,”मेरे हिसाब से तुम्हें इस फिल्म में ज़रूर काम करना चाहिए। राजेंद्र कुमार हमेशा अच्छी स्क्रिप्ट ही फाइनल करता है।

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इसका मतलब की ये फिल्म ज़रूर कामयाब होगी।” ऋषि दा की बात मानकर साधना ने फिल्म मेरे महबूब में काम करने के लिए हामी भर दी। और ठीक वैसा ही हुआ जैसा कि ऋषि दा ने इनसे कहा था। फिल्म मेरे महबूब एक बड़ी हिट साबित हुई। साधना ने मल्टीस्टारर फिल्म वक्त में भी अच्छा काम किया था।

बीमारी से भी लड़ी साधना

साधना का करियर बड़ा शानदार चल रहा था।

लेकिन इस बीच इन्हें थायरॉइड की समस्या भी होने लगी।

इस समस्या का इलाज कराने के लिए साधना अमेरिका गई। इस बीच फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा होने लगा कि फिल्म इंडस्ट्री को साधना ने हमेशा के लिए टाटा, बाय-बाय कर दिया है। और अब वो दोबारा किसी फिल्म में नज़र नहीं आने वाली हैं।

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लेकिन साधना फिल्मों में फिर लौटी और लौटने के बाद साधना ने,

इस तरह की बातें करने वाले लोगों को बड़ा करारा जवाब दिया।

ये नज़र आई फिल्म इंतकाम में।

ये फिल्म सुपरहिट रही और संजय खान के साथ साधना की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया।

इसके बाद फिल्म एक फूल दो माली ने तो सफलता के रिकॉर्ड्स ही बना दिए।

इस फिल्म में भी इनके साथ संजय खान ही थे।

वहीं डायरेक्टर राज खोसला के साथ भी इनकी जोड़ी खूब जमी।

राज खोसला की फिल्म वो कौन थी और मेरा साया में इन्होंने बड़ा दमदार अभिनय किया,

और इन फिल्मों के बाद तो इन्हें बॉलीवुड की मिस्ट्री गर्ल कहा जाने लगा था।

डायरेक्शन में भी रखा था कदम

साधना जी ने फिल्म गीता मेरा नाम से डायरेक्शन में भी कदम रखा।

इस फिल्म में डबल रोल निभाने के अलावा इन्होंने फिल्म को डायरेक्ट भी किया था।

इस फिल्म के प्रोड्यूसर इनके पति आर.के.नैय्यर साहब ही थे।

साधना ने इस फिल्म के बाद से ही धीरे-धीरे खुद को फिल्म इंडस्ट्री से दूर करना शुरू कर दिया था।

एक इंटरव्यू में साधना ने साफ कह दिया था,

कि वो अगर फिल्मों में काम करेंगी तो सिर्फ और सिर्फ हिरोइन के तौर पर ही करेंगी।

कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर वो कभी काम नहीं करेंगी।

और हुआ भी कुछ ऐसा ही। मेरा नाम गीता के बाद ये कुछ फिल्मों में ही दिखी।

उसके बाद ये फिल्मों से पूरी तरह से गायब हो गई।

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साधना की प्रमुख फिल्में

अपने करियर में इन्होंने लगभग 33 फिल्मों में ही काम किया। इनकी प्रमुख फिल्मों की बात करें तो ये नज़र आई आप आए बहार आई, राजकुमार, अमानत, वंदना, दिल दौलत दुनिया, अनिता, सच्चाई, आरज़ू, असली-नकली, इश्क पर ज़ोर नहीं और गबन जैसी सुपरहिट फिल्मों में। सुनील दत्त हों या फिर शम्मी कपूर, संजय खान हों या फिर देवानंद, या फिर राजेंद्र कुमार, हर हीरो के साथ इनकी जोड़ी दर्शकों को पसंद आई।

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ऐसी थी इनकी निज़ी ज़िंदगी

बात अगर इनकी निज़ी ज़िंदगी के बारे में करें,

तो इन्होंने अपनी पहली फिल्म लव इन शिमला की शूटिंग के दौरान ही,

अपना दिल फिल्म के डायरेक्टर आर.के.नैय्यर को दे दिया था।

लेकिन चूंकि उस वक्त इनकी उम्र बहुत ज़्यादा नहीं थी,

तो इनके माता-पिता ने उस समय इस जोड़ी की शादी नहीं होने दी।

लेकिन छह साल के बाद इन दोनों ने शादी रचाई।

ये आर.के.नैय्यर ही थे जिन्होंने साधना का वो यूनीक हेयरस्टाइल इजाद किया था।

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ऐसे ईजाद हुआ था साधना कट

दरअसल, साधना का माथा बेहद चौड़ा था। आर.के.नैयर उनका माथा छिपाना चाहते थे।

ऐसे में उन्होंने अपनी पसंदीदा ब्रिटिश एक्ट्रेस ऑड्री हेपबर्न के जैसा हेयरस्टाइल इन्हें दे दिया।

लेकिन भारत में ये हेयरस्टाइल इनके नाम से, यानि साधना कट के नाम से मशहूर हो गया।

वेटरन एक्ट्रेस बबीता इनके सगे चाचा की बेटी थी।

इस लिहाज से करिश्मा कपूर और करीना कपूर की ये मौसी लगती थी।

साधना और नैय्यर साहब की कोई औलाद नहीं थी।

लेकिन इन दोनों के प्यार में कभी कोई कमी नहीं आई।

सन 1995 में नैयर साहब की अस्थमा के कारण मौत हो गई।

और उसके बाद से ही साधना भी अकेली हो गई।

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नहीं मिला कोई अवॉर्ड

साधना इतनी ज़बरदस्त अदाकारा थी। लेकिन फिर भी इन्हें कभी कोई अवॉर्ड नहीं मिला था।

हालांकि फिल्म वो कौन थी और वक्त के लिए ये लगातार दो साल,

फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट ज़रूर हुई थी।

लेकिन सन 2002 में फिल्म इंडस्ट्री ने इन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड ज़रूर दिया था।

ज़िंदगी के अंतिम सालों में इन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्करों में भी उलझना पड़ा था।

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और दुनिया से चली गई साधना

दरअसल, जिस घर में साधना रहती थी उस पर मुकदमा चल रहा था,

और बीमार होने के बावजूद भी साधना को अदालत और पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने पड़ रहे थे।

ये कई दफा काफी ज़्यादा बीमार हुई और एक दिन मालूम चला कि इन्हें कैंसर हो गया है।

25 दिसंबर 2015 को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में साधना जी ने अपनी आखिरी सांस ली,

और फिर अनंत की यात्रा पर रवाना हो गई। किस्सा टीवी साधना जी को नमन करता है।

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