Saurabh Shukla Biography: कल्लू मामा की ज़िंदगी की पूरी कहानी

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Photo: Social Media

Saurabh Shukla. हममें से कई लोग इन्हें कल्लू मामा के नाम से जानते हैं। कई लोग जॉली एलएलबी के जज साहब के रूप में इन्हें पहचानते हैं। ये ना केवल एक ज़बरदस्त एक्टर हैं, बल्कि एक शानदार डायरेक्टर और एक बेहतरीन स्क्रीनराइटर भी हैं। छोटे पर्दे से लेकर फिल्मों तक में इन्होंने अपनी अदायगी से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। चाहे विलेनी रही हो, या फिर कॉमेडी। सौरभ शुक्ला के हर अंदाज़ को पसंद किया गया।

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Modern Kabootar आज आपको Saurabh Shukla की ज़िंदगी का किस्सा बताएगा। हम जानेंगे कि कैसे शिक्षकों के परिवार में पैदा हुए Saurabh Shukla फिल्म इंडस्ट्री पहुंचे और फिर कैसे फिल्म इंडस्ट्री में इन्होंने इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।

Gorakhpur में हुआ था Saurabh Shukla का जन्म

5 मार्च 1963। Shatrughan Shukla और Jogmaya Shukla के घर इनका जन्म हुआ था। जन्म स्थान था गोरखपुर। इनकी मां जोगमाया शुक्ला भारत की पहली महिला तबला वादक थी। वहीं इनके पिता शत्रुघ्न शुक्ला भी आगरा घराने के गायक थे। सौरभ की उम्र जब मात्र दो साल थी। तब ही उनके माता-पिता गोरखपुर से दिल्ली आ गए थे। दरअसल, इनके पिता दिल्ली यूनिवर्सिटी में संगीत विभाग में विभागाध्यक्ष के तौर पर नियुक्त हुए थे।

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इनकी माता जोगमाया देवी भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के संगीत विभाग में प्रोफेसर थी। बचपन से ही इन्हें कला का माहौल मिला, सो कम उम्र से ही ये भी कला की तरफ आकर्षित होना शुरू हो गए थे। सौरभ जैसे-जैसे बड़े हुए, इन्होंने लिखना शुरू कर दिया। शुरू में ये कहानियां लिखते थे। बाद में कविताएं लिखना भी इन्होंने शुरू कर दिया।

इस तरह एक्टिंग में आए Saurabh Shukla

सौरभ शुक्ला ने Delhi University के Khalsa College से अपनी पढ़ाई की थी। इन्होंने बीकॉम किया था। कॉलेज के दिनों में ही इन्होंने नाटक लिखना भी शुरू कर दिया था और अपने लिखे नाटकों का डायरेक्शन भी ये खुद ही किया करते थे। हालांकि इस वक्त तक इन्होंने ये ज़रा भी नहीं सोचा था कि एक दिन ये एक्टर बनेंगे। हुआ कुछ यूं था कि जब ये अपने कॉलेज के फर्स्ट ईयर में थे तो इन्होंने एक नाटक लिखा था जिसका डायरेक्शन ये खुद ही कर रहे थे।

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इत्तेफाक से उस नाटक में हिस्सा लेने वाला एक कलाकार उस दिन नहीं आया जिस दिन वो नाटक होना था। मजबूरी में इन्होंने खुद ही उस कलाकार का किरदार निभाया। लेकिन हुआ कुछ यूं कि इन्होंने वो किरदार बड़े ही शानदार ढंग से निभाया। नाटक खत्म होने के बाद हर किसी ने सौरभ शुक्ला के अभिनय की तारीफ की। दोस्तों की तरफ से मिली इतनी तारीफों ने सौरभ को भविष्य में भी एक्टिंग करते रहने के लिए प्रेरित किया।

एनएसडी में भी की नौकरी

सौरभ शुक्ला के कई बड़े फैंस भी इस बात से शायद ही वाकिफ होंगे कि अपने स्कूल के दिनों में ये स्पोर्ट्स में भी काफी दिलचस्पी रखते थे। बैडमिंटन और टेबिल टेनिस में ये अपने स्कूल में चैंपियन थे। वहीं क्रिकेट खेलने का भी इन्हें बेहद शौक था और सुनील गावस्कर इनके रोल मॉडल हुआ करते थे। ये गावस्कर की तरह ही क्रिकेटर बनना चाहते थे और भारत के लिए क्रिकेट खेलना चाहते थे। लेकिन कुछ समय बाद इन्हें ये अहसास भी हो गया कि ये क्रिकेट के लिए नहीं बने हैं।

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कॉलेज में जब सौरभ नाटकों की दुनिया से जुड़े और इन्होंने जब एक नाटक में एक्टिंग की तो उसके बाद एक्टिंग करने में इन्हें काफी मज़ा आने लगा। इन्होंने कई नाटकों में काम किया और इनके नाटक काफी पसंद भी किए गए। यहां ये बताना भी ज़रूरी है कि सौरभ शुक्ला ने कोशिश की थी कि इन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला मिल जाए। लेकिन इनकी कोशिश बेकार गई और इन्हें एनएसडी में दाखिला नहीं मिल पाया। इससे ये काफी दुखी भी हुए थे। हालांकि बाद में संयोग कुछ ऐसा बना था कि इन्हें एनएसडी की रेपेटरी में नौकरी मिल गई थी।

इस तरह Saurabh Shukla को मिली पहली फिल्म

ये कहानी भी बड़ी दिलचस्प है कि सौरभ फिल्मों में कैसे आए। दरअसल, सौरभ को एनएसडी की रेपेटरी में नौकरी करते हुए दो साल का वक्त हो चुका था। फिर जब शेखर कपूर अपनी फिल्म बैंडिट क्वीन के लिए अभिनेताओं को तलाश कर रहे थे तो सौरभ ने भी ऑडिशन दिया। मगर सौरभ को बैंडिट क्वीन के लिए नहीं चुना गया। सौरभ को इसका काफी अफसोस भी हुआ। फिर एक दिन सौरभ एनएसडी में ही एक नाटक कर रहे थे। उस नाटक का पहला दृश्य सौरभ का ही था और वही उस नाटक के सूत्रधार भी थे।

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इत्तेफाक से इस नाटक को देखने आए दर्शकों में शेखर कपूर भी मौजूद थे। शेखर को सौरभ की एक्टिंग इतनी पसंद आई कि उन्होंने फैसला कर लिया कि वो बैंडिट क्वीन में इस एक्टर को ज़रूर लेंगे। शेखर ने तब अपने असिस्टेंट रहे तिग्मांशू धूलिया से कहा कि इस एक्टर के लिए बैंडिट क्वीन में किरदार लिखा जाए क्योंकि वो हर हाल में इस एक्टर को बैंडिट क्वीन में लेना चाहते हैं। तब सौरभ के लिए बैंडिट क्वीन में कैलाश का किरदार लिखा गया। और इस तरह बैंडिट क्वीन सौरभ शुक्ला की पहली फिल्म बनी।

दूरदर्शन पर भी किया काम

Bandit Queen की सारी Shooting Dhaulpur में हुई थी।

उसके बाद Shekhar Kapoor के ही बुलावे पर सौरभ पहली दफा मुंबई पहुंचे थे।

मुंबई पहुंचने के बाद शेखर की मुलाकात बॉलीवुड के कई दिग्गजों से हुई।

इनमें सबसे प्रमुख थे Sudhir Mishra,

जो उम्र में सौरभ से काफी बड़े होने के बावजूद भी उनके अच्छे दोस्त बन गए थे।

मुंबई आने के बाद सौरभ ने सीधे ही एक्टिंग शुरू नहीं की।

इन्होंने लेखन में भी अपना हाथ आज़माना शुरू कर दिया।

इनका लिखा एक टीवी शो Doordarshan पर बेहद मशहूर हुआ था जिसका नाम था Tehkikat.

इस शो में इन्होंने एक्टिंग भी की थी,

और ये इस शो में Gopichand बने थे जो कि शो के लीड कैरेक्टर Sam का असिस्टेंट था।

तहकीकात के अलावा सौरभ शुक्ला ने अपने करियर के शुरूआती दौर में ही,

ज़ी टीवी पर आने वाले शो 9 Malabar Hill को भी लिखा था।

सौरभ ने इस शो में भी एक्टिंग की थी।

इस तरह सौरभ ना केवल एक्टिंग बल्की अपनी राइटिंग के चलते भी मुंबई में मशहूर होने लगे थे।

सौरभ शुक्ला ने दूरदर्शन के बेहद लोकप्रिय शो Mulla Nasruddin में भी काम किया था,

और इन्हें काफी पसंद भी किया गया था।

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इस फिल्म ने किया मशहूर

सौरभ के करियर की दूसरी फिल्म थी इस रात की सुबह नहीं।

इस फिल्म में इनके किरदार का नाम था विलास पांडे।

इनका वो किरदार था तो बहुत छोटा,

लेकिन सिने प्रेमियों को इस बात का अंदाज़ा ज़रूर लग चुका था,

कि ये नया लड़का केवल सीरियल्स में ही नहीं, फिल्मों में भी ज़बरदस्त एक्टिंग कर सकता है।

इसके बाद ये नज़र आए दो साल बाद यानि साल 1998 में रिलीज़ हुई फिल्म करीब में।

इस फिल्म में ये बॉबी देओल के पिता बने थे।

फिर ज़ख्म फिल्म में ये गुरदयाल सिंह के किरदार में दिखे जो कि एक बेहद मजबूत किरदार था।

लेकिन बतौर एक्टर सौरभ शुक्ला को लोकप्रियता मिली ज़ख्म के बाद रिलीज़ हुई,

फिल्म सत्या में इनके निभाए कल्लू मामा के किरदार से।

इस फिल्म के साथ खास बात ये भी है कि इसके स्क्रीनराइटर भी खुद सौरभ शुक्ला ही थे।

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सौरभ के करियर की प्रमुख फिल्में

इसके बाद तो एज़ एन एक्टर इन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया। जैसे ताल, अर्जुन पंडित, दिल पे मत ले यार, नायक, कलकत्ता मेल, एक्सक्यूज़ मी, युवा, मुंबई एक्सप्रेस, यकीन, चेहरा, लगे रहो मुन्ना भाई, बर्फी, स्लमडॉग मिलेनियर, ये साली ज़िंदगी, पीके, किक, मोहल्ला अस्सी, और बाला। इनके करियर का अभी तक का सबसे यादगार रोल माना जाता है फिल्म जॉली एलएलबी में इनके द्वारा निभाया गया जज त्रिपाठी का किरदार। इस किरदार के लिए इन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

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बतौर लेखक इन्होंने सत्या, दिल पे मत ले यार, रघु रोमियो, कलकत्ता मेल, मुद्दा, मिथ्या, एसिड फैक्ट्री, रात गई बात गई, ऊंट पटांग, पप्पू कांट डांस साला और फैटसो सहित कुल 15 फिल्में लिखी। अपनी लिखी इन 15 फिल्मों में से इन्होंने मुद्दा, चेहरा, रात गई बात गई, आई एम 24 और पप्पू कांट डांस साला का निर्देशन भी इन्होंने खुद किया।

ऐसी है सौरभ की निज़ी ज़िंदगी

सौरभ की निज़ी ज़िंदगी के बारे में बात करें तो इन्होंने Barnali Ray Shukla से शादी की है।

इनकी Wife भी एक अच्छी लेखक और डायरेक्टर हैं।

सौरभ शुक्ला को घूमना-फिरना बेहद पसंद है और मौका मिलने पर,

ये अक्सर कहीं ना कहीं घूमने निकल जाते हैं।

सौरभ शुक्ला के लिए Modern Kabootar यही प्रार्थना करता है,

कि वो आगे भी हमें एक से बढ़कर एक फिल्में देते रहें,

और अपनी शानदार और जीवंत एक्टिंग से हमारा मनोरंजन करते रहें। जय हिंद।

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