August 5, 2021

Rafi Lata Fight: रफी साहब और लता जी के बीच की वो लड़ाई जिसने संगीत प्रेमियों का दिल तोड़ दिया

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Photo: Social Media

Rafi Lata Fight. मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर। भारतीय संगीत की दो महानतम हस्तियां। संगीत का जानकार हर इंसान इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ होगा कि लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी का भारतीय संगीत में क्या दर्जा है। इन दोनों गायकों ने भारत का नाम विश्व संगीत पटल पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराया। आज भी जब कहीं पर रफी साहब और लता जी का साथ गाया हुआ कोई गीत प्ले हो जाए तो कुछ सेकेंड्स के लिए ही सही, हर संगीत प्रेमी का ध्यान उस तरह जाता ही जाता है जहां वो गीत बज रहा हो।

ये दोनों गायक संगीत साधना करनें वालों के अराध्य हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच विवाद हो गया। वो विवाद इतना अजीब था कि इन दोनों को जानने-मानने वाले लोग यकीन ही नहीं कर पा रहे थे कि हिंदुस्तानी संगीत के दो बड़े नामों के बीच भी ऐसा हो सकता है।

Modern Kabootar आज आपको Lata Mangeshkar और Mohd Rafi के बीच हुई उस लड़ाई की कहानी बताएगा जो बिल्कुल भी शालीन नहीं थी। और जिसने इन दोनों के चाहने वालों के दिलों को बुरी तरह तोड़कर रख दिया था। Rafi Lata Fight.

इस वजह से हुई थी लड़ाई (Rafi Lata Fight)

लेखक प्रयाग शुक्ल ने अपनी किताब “मोहम्मद रफी: स्वंय ईश्वर की आवाज़” में रफी साहब और लता जी के बीच हुए उस विवाद को काफी अच्छी तरह से लिखा है। इस किताब में लिखा है कि जब लता मंगेशकर के सामने मोहम्मद रफी का नाम आता है तो वो उस दौर में चली जाती हैं जब रफी साहब ने एक मुद्दे पर उनसे पूरी तरह से असहमति जताई थी। वो मुद्दा था एक गायक को किसी गीत के लिए रॉयल्टी मिले या फिर ना मिले।

किताब में लता जी के बारे में ये लिखा है

किताब के मुताबिक, लता जी बेशक महानतम गायिका हैं। लेकिन कई दफा कई मामलों में वो खुद को काफी असुरक्षित महसूस करने लग जाती थी। कोई भी दूसरी गायिका जो लता जी को अपनी प्रतिद्वंदी लगती थी उसके प्रति लता जी कभी उदार नहीं रहीं। खुद आशा भोंसले जो कि लता जी की सगी बहन थी, वो भी लता जी के व्यक्तित्व के इस पहलू का शिकार हो चुकी हैं।

रफी साहब ने जताई थी लता जी से असहमति

एक दफा जब लता मंगेशकर ने कहा कि सिंगर को गाने की रॉयल्टी मिलनी ही चाहिए तो रफी साहब ने लता जी के इस विचार को ये कहकर खारिज कर दिया कि एक बार अगर गायक कोई गीत रिकॉर्ड कर देता है तो उस गीत पर गायक का कोई अधिकार नहीं रहता। उस गीत को गाने के बदले गायक को जो फीस मिली है वही उसका जायज़ हक है।

रफी साहब के इस विचार से लता जी उनसे नाराज़ हो गई। इस मुद्दे पर जहां फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग लता जी के साथ खड़े थे तो वहीं कई ऐसे थे जो रफी साहब के विचारों से सहमत थे। लता जी और रफी साहब के बीच का ये विवाद इतना ज़्यादा बढ़ गया था कि चार सालों तक इन दो महान गायकों ने कोई भी गीत साथ नहीं गाया था।

लता जी ने रफी साहब के साथ गाना छोड़ दिया

रॉयल्टी मुद्दे पर लता जी रफी साहब से इतना नाराज़ थी कि उन्होंने रफी साहब के साथ गाना छोड़ दिया। हालांकि रफी साहब ने कभी भी अपनी तरफ से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था। लेकिन जब लता जी हर दफा उनके साथ गाना गाने से मना कर देती थी तो फिर रफी साहब ने भी लता जी के साथ गाना गाने में दिलचस्पी लेना बंद कर दिया। किसी ने जब इस बारे में रफी साहब से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि जब लता जी की मेरे साथ गाने में कोई दिलचस्पी नहीं है तो भला मुझे भी उनके साथ गाने में कोई दिलचस्पी कैसे हो सकती है।

सुमन कल्याणपुरी ने ली लता जी की जगह

रफी साहब और लता जी के बीच के इस विवाद से उस दौर के डायरेक्टर्स और म्यूज़िक डायरेक्टर्स के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई। उन्होंने काफी कोशिश की इन दोनों महान गायकों को मनाने की। लेकिन दोनों ही अपनी ज़िद पर अड़े हुए थे। तब वो डायरेक्टर्स जिन्हें अपनी फिल्म के लिए रफी साहब की आवाज़ हर हाल में चाहिए थी उन्होंने इस विवाद का एक तोड़ निकाला। उन्होंने रफी साहब के साथ सुमन कल्याणपुर की आवाज़ लेनी शुरू कर दी।

दोबारा इस तरह साथ आए रफी साहब और लता जी

रफी साहब और सुमन कल्याणपुर के गाए गीत हिट होने लगे। और ये बात लता जी को परेशान करने लगी। किताब में जो लिखा है उसके मुताबिक, एक दिन लता जी ने संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन से संपर्क किया और उनसे आग्रह किया कि रफी साहब के साथ उनकी सुलह करा दी जाए। शंकर-जयकिशन ने कोशिशें शुरू की और उनकी कोशिशें रंग भी लाई।

चार साल के बाद एक फिल्म में लता जी और रफी साहब ने एक साथ एक गाना रिकॉर्ड किया। और इस तरह रफी साहब और लता जी के बीच की ये लड़ाई खत्म हुई। लेकिन ये विवाद रफी साहब की मौत के सालों बाद एक बार फिर से खड़ा हो गया।

लता जी ने कही विवादास्पद बातें

हुआ दरअसल यूं कि साल 2012 में लता मंगेशकर ने एक अखबार को एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में लता जी ने रफी साहब और खुद के बीच हुए उस विवाद पर काफी कुछ कहा। लता जी ने उसी इंटरव्यू में कुछ ऐसा भी कहा था जिससे रफी साहब के बेटे शाहिद रफी काफी नाराज़ हो गए। लता जी ने उस इंटरव्यू में कहा कि रफी साहब ने उन्हें माफीनामे की एक चिट्ठी लिखी थी इसलिए वो विवाद खत्म हुआ था। लता जी के इस बयान ने लोगों को हैरान कर दिया था।

लता जी ने ये भी कहा

दरअसल उस इंटरव्यू में लता जी ने ये भी कहा था कि “एक दफा उस दौर के सभी बड़े गायक एक जगह मौजूद थे। तब रफी साहब अचानक कुर्सी से खड़े हुए और उन्होंने सबके सामने घोषणा की कि आज से वो कभी लता जी के साथ नहीं गाएंगे। इस पर उन्होंने यानि लता जी ने वहीं सबके सामने कहा कि रफी साहब आप मेरे साथ नहीं गाएंगे ये गलत बात है। मैं आपके साथ नहीं गाऊंगी।” इसके बाद लता जी ने सभी संगीतकारों से कह दिया कि रफी साहब के साथ उनके जो भी ड्यूट शेड्यूल हैं उनमें मेल सिंगर बदल दिया जाए। वो अब कभी भी रफी साहब के साथ नहीं गाएंगी।

लता जी का वो विवादास्पद दावा (Rafi Lata Fight)

रफी साहब के साथ विवाद खत्म होने के सवाल पर लता जी ने कहा था कि “संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन ने वो विवाद खत्म करने की पहल की थी। मैंने शंकर-जयकिशन से कहा था कि अगर रफी साहब लिखित में माफीनामा देंगे तो ही विवाद खत्म होगा। रफी साहब ने लिखित में माफीनामा दे दिया और वो झगड़ा खत्म हो गया।”

लता जी के इस बयान पर रफी साहब के बेटे शाहिद रफी ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि “लता जी साफ झूठ बोल रही हैं। अब ना तो रफी साहब हैं और ना ही शंकर-जयकिशन हैं। इसलिए लता जी ये झूठ बोल रही हैं क्योंकि वो जानती हैं कि उनके इस झूठ को पकड़ने वाला कोई भी अब इस दुनिया में नहीं है।”

शाहिद रफी ने ये भी कहा (Rafi Lata Fight)

शाहिद रफी ने ये भी कहा कि उनके पिता मोहम्मद रफी इतने ज़्यादा पढ़े-लिखे थे ही नहीं कि वो किसी को माफीनामा लिख सकें। वो केवल कागज पर लिखकर दिए गए गीतों को ही पढ़ पाते थे। शाहिद रफी ने कहा कि “अगर लता जी को वाकई में मेरे पिता ने कोई माफीनामा लिखा था तो उन्हें वो माफीनामा सार्वजनिक करना चाहिए। नहीं तो उन पर झूठी होने का ठप्पा लग जाएगा।”

हैरान रह गए थे संगीत प्रेमी

लता जी ने कभी भी रफी साहब के बेटे शाहिद रफी की बातों का कोई जवाब नहीं दिया। ना ही उन्होंने वो माफीनामा कभी सार्वजनिक किया जो उनके मुताबिक रफी साहब ने उन्हें लिखा था। लेकिन सालों बाद उनके द्वारा सालों पहले हुए उनके और रफी साहब के बीच के विवाद को लेकर नए दावे करने से संगीत प्रेमियों को काफी अचंभा ज़रूर हुआ था।

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