August 5, 2021

Pehli Baarish को देखने में जो मज़ा मिलता है वो अपने आप में बड़ा खास होता है

Pehli-Baarish

Pehli Baarish. कई दिनों तक लगातार झुलसने के बाद आखिरकार आज गर्मी से राहत मिल ही गई। बादल तो तीन-चार दिन से छाए हुए थे। लेकिन आज हुई झमाझम बारिश ने लोगों को बड़ी राहत दी है। ये बात अलग है कि बारिश होने पर हर बार हमारा मुहल्ला मुहल्ला कम, कोई गटर या गंदा तालाब ज़्यादा लगता है। लेकिन फिर भी आज दिल में सुकून है कि चलो कम से कम आज तो पंखे के नीचे गर्म नहीं बल्कि ठंडी हवा लगेगी।

अब नहीं देख सकते वो हरियाली

पतनाले से धीरे-धीरे गिरता हुआ पानी देखने में भी मज़ा आ रहा है। मुहल्ले के घर बारिश में भीग चुके हैं और दूर दिखाई दे रही हरियाली पहले से भी ज़्यादा खूबसूरत नज़र आने लगी है। अफसोस कि उस हरियाली को अब हम करीब जाकर नहीं निहार सकते। आर्मी वालों ने वहां जाने पर पाबंदी जो लगा दी है। लेकिन आर्मी वालों के इस आदेश का हमारे मुहल्ले के लोग पूरा सम्मान करते हैं और गाय-भैंस पालने वाले लोगों के अलावा अब खेतों में कोई और नहीं घुसता।

सड़क के उस पार सुअर हमेशा की तरह अपनी धुन में मग्न है। हालांकि वो भी पहली बारिश का मज़ा ले रहा है। सुअर की लापरवाह चाल मानो कह रही है कि हमें कोई पसंद नहीं करता तो ना करे। हम भी किसी से मतलब नहीं रखना चाहते। Pehli Baarish.

ब्रैड पकौड़ों का मज़ा

बारिश का मौसम था तो मैंने सोचा कि क्यों ना गर्मागरम ब्रैड पकौड़ा खाया जाए। तेल में तले जा रहे ब्रैड पकौड़े को देखकर आज कुछ अलग ही मज़ा आ रहा है। मानो ये ब्रैड पकौड़ा खौलते तेल को अपनी आवाज़ बनाकर कह रहा हो कि मुझे तुम्हारा ही तो इंतज़ार था। इस भीगे हुए मौसम में सड़क से गुज़रते वाहनों को देखकर अच्छा लग रहा है। हालांकि मुझे पता है कि ये मज़ा कुछ देर का ही है। क्योंकि बारिश के रुकते ही कीचड़ और गंदगी का भी सामना करना पड़ेगा। लेकिन फिर भी। इस पल को मैं एंजॉय कर रहा हूं। इसका लुत्फ उठा रहा हूं। इसी का नाम ही तो ज़िंदगी है। दुनिया-जहान की तमाम फिक्र एक किनारे छोड़कर हर छोटी-छोटी खुशी का लुत्फ उठाना।