Cheap Food के शौकीन हो तो 25 पैसे में कचौड़ी खाने देश के इस हिस्से में फटाफट पहुंचो

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बात अगर Cheap Food की हो तो कोई आज के ज़माने में सोच भी नहीं सकता कि 25 पैसे में भी कुछ मिल सकता है। जिन लोगों ने अपना बचपन 90s के शुरूआती सालों में जिया है वो जानते हैं कि 25 पैसे भी उस दौर में बच्चों को दिल बहलाने के लिए दे दिए जाते थे। 25 पैसे में कई बढ़िया टॉफियां आया करती थी। लेकिन आज के ज़माने में 25 पैसे में कुछ खरीदने की उम्मीद से अगर कोई बाज़ार में जाएगा तो लोग उसे पागल समझकर उसका मज़ाक उड़ाएंगे।

मगर हमारे देश में एक जगह ऐसी है जहां आज भी 25 पैसे में कुछ मिलता है।

कहां है ये जगह?

ये जगह है कोलकाता और यहां का एक कचौड़ी वाला आज के ज़माने में भी 25 पैसे में कचौड़ी बेच रहा है। आपको शायद यकीन ना हो। आप सोच रहे होंगे कि महंगाई के इस दौर में 25 पैसे में कोई कचौड़ी भला कैसे बेच सकता है। लेकिन हमारा यकीन कीजिए। ऐसा सच में है। ये इंसान वाकई में 25 पैसे में कचौड़ी बेच रहा है। और हाल-फिलहाल से नहीं, पिछले 29 सालों से ये इंसान मात्र 25 पैसे में कोलकाता शहर में कचौड़ी बेच रहा है।

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कौन हैं ये जनाब?

ये चमत्कार करने वाले सज्जन का नाम है लक्ष्मी नारायण घोष। साल 1990 में इन्होंने एक खाली पड़े कमरे में अपनी दुकान शुरू की थी। ये वो दौर था जब बंगाल में ज्योति बसु की सरकार थी और कोलकाता में 50 पैसे की एक कचौड़ी बिका करती थी। जिस जगह पर लक्ष्मी नारायण घोष की दुकान है वो कोलकाता के मनिकलता के मुरारीपुकुर इलाके में मौजूद है। इस इलाके में कई सारे स्कूल हैं और लंच के समय ढेरों बच्चे इस इलाके में कचौड़ी खाने के लिए जमा हो जाते हैं।

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कैसे हुई सस्ती कचौड़ी की शुरूआत?

इन स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चे ऐसे भी थे जो गरीब घरों से थे और भरपेट कचौड़ी नहीं खा पाते थे। इन्हीं बच्चों को देखते हुए लक्ष्मी नारायण घोष ने अपनी दुकान पर कचौड़ी के दाम आधे कर दिए। घोष बाबू चाहते थे कि कोई भी बच्चा कचौड़ी खाने से वंचित ना रहे। सुबह 7 बचे घोष बाबू अपनी दुकान खोल देते हैं और 10 बजे तक इनकी दुकान के सामने कचौड़ी खाने वालों की लाइन लगी रहती है। फिर दोपहर 2 बजे से घोष बाबू अपनी दुकान पर स्कूल के बच्चों के लिए अलूर चोप, बेगुनी, पेयाजी, ढोकर चोप और मोचार चोप बेचते हैं। कीमत होती है मात्र 1 रुपए।

एक इंटरव्यू में लक्ष्मी नारायण घोष जी ने बताया कि उनके यहां कचौड़ी खाने वाले कई ग्राहक तो ऐसे हैं जो उसी साल से कचौड़ी खा रहे हैं जब उन्होंने अपनी दुकान खोली थी। अगर वो कचौड़ी के दाम बढ़ाएंगे तो उन लोगों को बेहद निराशा होगी। साथ ही काफी वक्त से स्कूल के बच्चे भी उनकी दुकान पर कचौड़ी खाने के लिए आते हैं। बच्चों को अपनी दुकान पर बेहद मामूली सी कीमत पर कचौड़ी खाते देखकर उन्हें बेहद खुशी मिलती है।

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