India Railways की ये Trains जाती हैं विदेशों तक, भविष्य में और भी देशों संग जुड़ने की है प्लानिंग

Indian Railways - Photo: Pixabay

हमारा Indian Railways दुनिया के सबसे विशाल Railway Networks में से एक है। हमारे यहां हर रोज़ 12 हज़ार से भी अधिक Trains चलती हैं। लाखों लोग हर दिन Indian Railways में सफर करते हैं और लाखों लोगों को रेलवे की वजह से रोजगार मिलता है। दोस्तों Indian Railways का इतिहास भी बेहद गौरवशाली है। India में कई superfast, express और passanger trains चलती हैं। मौजूदा सरकार India में Bullet Train शुरू करने की योजना पर भी काम कर रही है।

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लेकिन आज हम और आप उन रेलगाड़ियों का ज़िक्र करेंगे जो भारत से भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशोँ तक जाती हैं।

01- भारत से बांग्लादेश 

भारत और बांग्लादेश के बीच भी रेल सेवा है। भारत के पश्चिम बंगाल राज्य की राजधानी कोलकाता से बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बीच दो रेलगाड़ियां चलती हैं। एक रेलगाड़ी का नाम है मैत्री एक्सप्रेस। लोग इसे फ्रेंडशिप एक्सप्रेस के नाम से भी जानते हैं। इस रेलगाड़ी को 2008 से चलाना शुरू किया गया था। ये ट्रेन इतनी लोकप्रिय हुई कि 2017 में भारत और बांग्लादेश के बीच बंधन एक्सप्रेस नाम से एक और रेलगाड़ी शुरू की गई। कोलकाता से ढाका के बीच की दूरी 375 दूर है।

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02- भारत से पाकिस्तान

भले ही भारत और पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा से बेहद तनावपूर्ण रहे हों, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच रेल सेवा सालों से जारी है। भारत और पाकिस्तान के बीच 2 रेलगाड़ियां चलती हैं जिनके नाम हैं समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस। समझौता एक्सप्रेस की शुरूआत हुई थी 22 जुलाई 1976 को। हालांकी बीच-बीच में ये कई दफा बंद भी हुई है। ये ट्रेन सप्ताह में एक ही बार चलती है। समझौता एक्सप्रेस पंजाब के अटारी से चलकर पाकिस्तान के लाहौर तक जाती है। ये दूरी मात्र 27 किलोमीटर है।

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क्या हैं भारतीय रेल की भविष्य की योजनाएं?

भविष्य में भारतीय रेल और भी पड़ोसी देशों के साथ रेल सेवा शुरू करने पर विचार कर रहा है। इस कड़ी में सबसे पहला नाम है नेपाल का। नेपाल के उन शहरों तक रेल सेवा शुरू की जा सकती है जो भारत की सीमा के नज़दीक हैं। नेपाल के अलावा भूटान को भी भारतीय रेल से जोड़ने का विचार चल रहा है।

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इतना ही नहीं, नेपाल और भूटान के बाद हो सकता है कि भारतीय रेल की पहुंच म्यांमार, वियतनाम, थाईलैंड और चीन तक भी हो जाए। हालांकि इसमें अभी कई साल लग जाएंगे। लेकिन जिस तरह से भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध और मजबूत कर रहा है(पाकिस्तान को छोड़कर) उसे देखते हुए ऐसा होने की उम्मीद करना बेमानी नहीं है। हालांकि इन देशों से भारत को रेल से जोड़ने में काफी खर्च और मेहनत भी लगेगी।

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