Engineering की लाखों की Job छोड़कर अब क्या कर रहे हैं भारत के ये 5 इंजीनियर?

Engineering हमारे भारत में हमेशा से मां-बाप का फेवरिट होता है।

भले ही बच्चे को इंजीनियर बनना ना हो,

लेकिन मां-बाप अपनी ज़िद के चलते हर साल लाखों बच्चों को,

जबरन इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने भेजते हैं।

अब कुछ बच्चे तो बेचारे चुपचाप पढ़ाई करके इंजीनियर बन जाते हैं और सारी उम्र नौकरी में ही निकाल देते हैं।

लेकिन कुछ होते हैं ऐसे जो मां-बाप की खुशी के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो करते हैं,

लेकिन उनका दिल इंजीनियरिंग में कभी नहीं लगता।

फिर एक वक्त ऐसा भी आता है जब ये बच्चे अपने मां-बाप की ख्वाहिशों से अलग अपने लिए जीना शुरू कर देते हैं।

आज हम आपको भारत के ऐसे ही 5 इंजीनियरों से मिला रहे है, जिन्होंने Engineering की लाखों की नौकरी छोड़कर खेती-किसानी शुरू कर दी और आज बेहद खुश हैं और अच्छा-खासा कमा भी रहे हैं।

1- हरीश धनदेव, जैसलमेर, राजस्थान (Engineering)

Harsih-Dhandev-Engineering
Photo Courtesy: thebetterindia.com

हरीश एक सिविल इंजीनियर थे। इन्होंने जैसलमेर के आर्य इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी।

साल 2013 में इन्होंने जैसलमेर म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में बतौर जूनियर इंजीनियर नौकरी शुरू की।

जब इनके पिता रिटायर हुए तो उन्होंने अपनी 80 एकड़ पुश्तैनी ज़मीन पर खेती करनी शुरू कर दी।

शुरू में हरीश अपने पिता का हाथ बंटाने कभी-कभार खेतों में आया करते थे।

बाद में हरीश को अहसास हुआ कि अगर वो आधूनिक तरीके से खेती करेंगे तो यकीनन बेहत कर पाएंगे।

हालांकि शुरूआत में हरीश अपनी नौकरी को छोड़कर पूरी तरह खेती में आने से हिचकिचा रहे थे।

लेकिन बाद में हिम्मत जुटाकर इन्होंने आखिरकार नौकरी छोड़कर खेती करना शुरू कर दिया।

हरीश की मेहनत और उनकी सूझ-बूझ रंग लाई। आज हरीश का सालाना टर्नओवर डेढ़ से दो करोड़ रुपए है।

2- सचिन काले, मेधपर, छत्तीसगढ़ (Engineering)

Sachin-Kale-Engineering
Photo Courtesy: thebetterindia.com

गुड़गांव में चौबीस लाख रुपए सालाना की सैलरी,

और एक बड़ी कंपनी में मैनेजर की नौकरी कर रहे सचिन काले की ज़िंदगी बेहद शानदार थी।

लेकिन इनके दादा जी की ख्वाहिश ने इन्हें आखिरकार नौकरी छोड़कर,

अपने होम टाउन मेधपुर वापस आने के लिए प्रेरित कर दिया।

अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर इन्होंने शुरूआत में मौसमी सब्जियों और धान की खेती करना शुरू कर दिया।

सचिन कहते हैं कि खेती करना उनके लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज थी। उन्हें खेती के बारे में कुछ मालूम नहीं था।

लेकिन कड़ी मेहनत, लगन और सूझ-बूझ से आज सचिन ने खेती से ही,

सालाना दो करोड़ रुपए का टर्नओवर कमाना शुरू कर दिया है।  उनकी अपनी कंपनी भी है।

इनोवेटिव एग्रीलाइफ सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम से। इनकी कंपनी से दो सौ से ज़्यादा किसान जुड़े हुए हैं।

3- सीवी श्रीनिधि, चमराजनगर, कर्नाटक (Engineering)

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हर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट की तरह ही शुरू में इनका सपना था आईटी सेक्टर में एक बढ़िया सी नौकरी ढूंढना।

ये इसमें कामयाब भी हुए। लेकिन ऑफिस में गलाकाट प्रतिस्पर्धा ने जल्द ही इनका मन नौकरी से हटा दिया।

इन्होंने अपनी पुश्तैनी एक एकड़ ज़मीन पर खेती करने की योजना बनाई। उनकी ये ज़मीन यूं ही खाली पड़ी थी।

जब अपना ये आईडिया इन्होंने अपने माता-पिता को बताया तो उन्होंने इनका घोर विरोध किया। स

बने कहा कि खेती की कोई जानकारी नहीं है।

नुकसान में रहोगे। लेकिन अपनी ज़िद के आगे श्रीनिधी ने किसी की एक ना सुनी,

और खेती की बिना किसी जानकारी के बावजूद भी इन्होंने अपनी ज़मीन पर फसल उगानी शुरू कर दी।

इनकी सूझ-बूझ और मेहनत ने आज इनकी बंजर पड़ी ज़मीन को लहलहाते फार्म में तब्दील कर दिया।

अब ये अपनी खेती से लाखों रुपए कमाते हैं।

4- राकेश सिहाग, बैजलपुर गांव, हरियाणा 

Rakesh-Sihag-Baijalpur-Village-Haryana
Photo Courtesy: thebetterindia.com

हालांकि राकेश हरियाणा के एक किसान परिवार से थे,

लेकिन किसानी में इनका मन शुरूआत में बिल्कुल भी नहीं लगता था।

इन्होंने अंबाला से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और नौकरी करना शुरू कर दिया।

लेकिन साल 2016 में इनके परिवार पर घोर आर्थिक संकट आ गया।

ऐसे वक्त में इन्होंने नौकरी छोड़ खेती करने का फैसला किया।

राकेश ने अपने चाचा और भाईयों के साथ मिलकर एक आधूनिक नर्सरी की शुरूआत की।

राकेश की मेहनत रंग लाई और आज ये चालीस लाख रुपए सालान का प्रोफिट कमा लेते हैं।

5- भव्या दीपेश, बेंगलुरू 

Bhavya-Deepesh
Photo Courtesy: thebetterindia.com

भव्या ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। लेकिन उनका मन हमेशा से खेती करने का किया करता था।

भव्या देखती थी कि बेंगलुरू और आस-पास के इलाकों में लोग गंदे पानी में ही सब्जियां उगाया करते थे।

अपने खेती के शौक के चलते भव्या की दोस्ती भी खेती का शौक रखने वाले लोगों से होने लगी।

दोस्तों के साथ ये अक्सर आस-पास की कई नर्सरियों में खेती की जानकारी लेने जाया करती थी।

भव्या का सपना था कि वो और उनके पति दोनों साथ में खेती करें।

पति ने साथ दिया और भव्या ने पति की पुश्तैनी ज़मीन पर ऑर्गैनिक तरीके से सब्जियां उगाना शुरू कर दिया।

आज बेंगलुरू में भव्या एक जाना-पहचाना नाम हैं। लोग भव्या के पास ताजा सब्जियां खरीदने आते हैं।

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