Chuppi Ki Awaz by Ankur Ujjawal: नए आशिक के प्रेम सरीखी जैसी एक किताब

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Photo: Social Media

Chuppi Ki Awaz Book by Ankur Ujjawal. कोरोना काल के मद्देनजर, आज उज्ज्वल अंकुर द्वारा रचित कविता संग्रह, चुप्पी की आवाज़ का विमोचन वर्चुअली किया गया।  इस विमोचन में जाने माने शायर और लेखक इरशाद खान सिकंदर जी, प्रख्यात पत्रकार श्री संजय श्रीवास्तव जी, चुप्पी की आवाज़ के इलस्ट्रेटर कपिल लाखवान जी के साथ साथ कला और साहित्य से जुड़े काफ़ी जानी मानी हस्तियाँ शुमार थीं। इस विमोचन का संचालन मीना कोटवाल ने किया।

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जहाँ Chuppi Ki Awaz को इरशाद खान ने एक नए आशिक़ के प्रेम जैसा बताया वहीं संजय श्रीवास्तव ने इसे एक ऐसी नदी सा कहा जिसका उदगम तो संकीर्ण है पर वह धीरे धीरे विराट समंदर सी हो जाती है।

मानव जीवन के अलग-अलग पहलुओं को टटोलती है Chuppi Ki Awaz

कपिल लखवान ने चुप्पी की आवाज़ की हर एक कविताओं पर बने इल्लस्ट्रेशन्स की काफ़ी दिलचस्प कहानियाँ साझा कीं। उज्ज्वल अंकुर द्वारा रचित कविताओं का संग्रह, “चुप्पी की आवाज़” मात्र एक किताब नहीं, बल्कि मिश्रित भावनाओं और एहसासों का एक संगम है। मानव जीवन के अलग-अलग पहलुओं को टटोलती ये कविताएँ सीधे दिल तक पहुँचती है।

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कॉलेज लाइफ हो, जिसमें सामान्यतः लोग कवि बन जाते हैं, और कविताओं में शब्द की जगह भावनाएँ तलाशते हैं, या सामाजिक-राजनैतिक परिवेश हो, जिसमें लोग बुद्धिजीवियों जैसी बातें करने लगते है। इन सभी विषयों का समावेश, “चुप्पी को आवाज़” को और भी ज़्यादा बुलंद करती है, और दूर तक पहुँचाती है।

दर्पण जैसी भी है चुप्पी की आवाज़

यह किताब आपको दर्पण सी लगेगी। इसमें कभी आपको छुटपन की बदमाशियाँ, और माँ-बाप का वो अतुल्य और आत्मिय प्रेम दिखेगा, तो कभी किशोरावस्था की अटखेलियाँ। कभी यह सोच की परिपक्वता को दर्शाएगी तो कभी जीवन और समाज के यथार्त को। अनेक भावनाओं से सुसज्जित यह “चुप्पी की आवाज़” आपके अन्तर्मन तक पहुँचेगी और आपको निराश नहीं करेगी ।

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क्या कहते हैं लेखक?

उज्ज्वल अंकुर का कहना है कि यह किताब, कविता और दृश्य कला का एक अनूठा संगम है।

इसमें हर कविता पर एक ड्रॉइंग की गई है, जिससे पाठक शब्दों की गहराई,

और उनकी महत्ता को और भी रोचक ढंग से समझ पाएँगे।

कपिल लखवान, और उज्ज्वल अंकुर के सम्मलित प्रयास से बनाई गईस

सभी ड्रॉइंग्स, पाठकों को दृश्य कला और साहित्य के अनूठे संबंध पर दृष्टि डालने पर विवश करते हैं।

“चुप्पी की आवाज़” आपको ख़ुद की आवाज़ लगेगी।

यह किताब अमेज़ॉन, फ्लिपकार्ट जैसी सभी महत्वपूर्ण ऑन-लाईन स्टोर्स पर उपलब्ध है।

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लेखक का परिचय

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में जन्में, उज्ज्वल अंकुर, नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान,

सत्यम फैशन इंस्टिट्यूट में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया से आर्ट एजुकेशन में स्नातक,

और नैशनल म्यूज़ियम इंस्टिट्यूट से आर्ट हिस्ट्री में स्नातकोत्तर करने वाले,

उज्ज्वल की उपलब्धियों में अनेकों आर्ट एक्सहिबिशन्स शुमार हैं।

देश-विदेश के अलग-अलग मंचों पर अपनी कला,

और विश्व कला इतिहास के बारे में बोलने वाले,

उज्ज्वल का साहित्य की ओर यह पहला कदम है।

कविताओं और कहानियों के प्रति इनके झुकाव नेस

“चुप्पी की आवाज़” के रूप में एक नया जन्म लिया है।

इस किताब के आने के बाद,

उज्ज्वल एक उपन्यास पर काम कर रहे हैं,जो जल्द ही प्रकाशित होगी।

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