Blue Blood वाले इस केंकड़े की डिमांड है दुनिया में सबसे ज़्यादा, इसका खून है बेहद खास

Blue Blood Horse Crab - Photo Credit: Getty Images

क्या आपने कभी सुना है कि किसी जानवर का Blue Blood भी होता है? शायद नहीं सुना होगा। आपको ये बात ज़रूर हैरान कर रही होगी, लेकिन ऐसा सच में होता है। इस दुनिया में एक जानवर ऐसा भी है जिसके खून का रंग लाल होता है। फर्क बस इतना है कि ये जानवर ज़मीन पर नहीं, बल्कि पानी के अंदर रहता है।

Blue Blood Horse Crab – Photo Credit: Getty Images

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस जानवर के 1 लीटर नीले खून की कीमत 11 लाख रुपए है। चलिए जानते हैं कि आखिर कौन सा ये जीव है और इसकी और क्या खासियतें हैं।

क्या नाम है इस जानवर का?

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तस्वीर देखकर तो अब तक आप भी समझ गए होंगे कि ये केकड़ा है। केकड़े की इस नस्ल को हॉर्स क्रैब कहते हैं। इसकी बनावट के चलते कुछ लोग इसे हॉर्स शू भी कहते हैं। ये बेहद दुर्लभ जानवर दुनिया के सबसे पुराने जीवों में से एक भी है। वैज्ञानिक दावा करते हैं कि 45 करोड़ साल पहले भी हॉर्स क्रैब पृथ्वी पर पाया जाता था।

कहां पाया जाता है ये केकड़ा?

नीले खून वाला ये केकड़ा प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर में पाया जाता है। बसंत के मौसम से लेकर मई और जून के महीनों तक ये केकड़े पानी में आराम से नज़र आ जाते हैं। उसके बाद समंदर की गहराईयों में खो जाते हैं। इतना ही नहीं, पूर्णिमा के समय आने वाले हाई टाइड में तो ये केकड़े समुद्र की सतह तक भी आ जाते हैं।

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इनका खून है दुनिया का सबसे महंगा तरल पदार्थ

अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में इस केकड़े के 1 लीटर खून की कीमत 11 लाख रुपए है। यही वजह है कि इनके खून को दुनिया का सबसे महंगा तरल पदार्थ भी कहा जाता है।

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कौन खरीदता है इनका खून?

इस केकड़े के खून को दवा कंपनियां खरदीती हैं। इनके खून से कई महंगी दवाईयां भी बनती हैं। 1970 से ही वैज्ञानिक हॉर्स क्रैब के खून का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की महंगी दवाईयों बनाने के लिए करते आ रहे हैं।

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हॉर्स क्रैब के खून से वो दवाई भी बनती है जिससे मेडिकल उपरकरणों और कई दूसरी दवाओं के बैक्टीरिया फ्री होने का पता लगाया जाता है। इनमें वो उपकरण भी शुमार हैं जिनका इस्तेमाल आईवी और टीकाकरण के लिए किया जाता है।

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आपको जानकर हैरानी होगी कि हर साल 5 करोड़ हॉर्स क्रैब को पकड़ा जाता है। लेकिन इनके शरीर से मात्र 30 फीसदी खून निकालकर इन्हें फिर से समंदर में छोड़ दिया जाता है। खास बात ये है कि इनके दिल के पास छेद करके इनका खून निकाला जाता है।

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इनके खून में एक ऐसा रसायन होता है जो किसी भी बैक्टीरिया की पहचान कर उसके आस-पास जमा हो जाता है। वैज्ञानिक तो ये भी दावा करते हैं कि इनके खून में तांबे की मात्रा भी अच्छी-खासी होती है। आपको बता दें कि 10 से लेकर 30 फीसदी केकड़े खून निकाले जाने की प्रक्रिया के दौरान मर भी जाते हैं।

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