Anirudh Agarwal कैसे बने बॉलीवुड का सबसे खतरनाक भूत और क्यों छोड़ा Hollywood?

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Anirudh Agarwal. अगर आप फिल्मों के शौकीन हैं।

और आपको हॉरर फिल्में भी पसंद आती हैं, तो आप इस नाम से वाकिफ होंगे।

अस्सी और नब्बे के दशक में भारत में बनने वाली तकरीबन हर हॉरर फिल्म में ये चेहरा नज़र आता था।

ये चेहरा इतना खौफनाक था, कि इसे एक दफा देखने के बाद,

कईयों को तो रात को ठीक से नींद तक नहीं आती थी।

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आज हम आपको इसी चेहरे के यानि Anirudh Agarwal के फिल्मों में भूत बनने का किस्सा सुनाएंगे, जो बेहद दिलचस्प है। और साथ ही बताएंगे कि आखिर क्यों Anirudh Agarwal ने हॉलीवुड फिल्मों के ऑफर्स ठुकरा दिए थे।

Anirudh Agarwal का शुरूआती जीवन

20 दिसंबर 1949। देहरादून के विकास नगर में एक बच्चे का जन्म हुआ। मां-बाप ने नाम दिया, अनिरुद्ध।

दस बहन भाईयों में आठवें नंबर पर पैदा हुए अनिरुद्ध के पिता देहरादून के पहाड़ी बाज़ार में आलू और राजमा के डीलर थे।

अनिरुद्ध का पूरा नाम था अनिरुद्ध अग्रवाल।

1967 में अनिरुद्ध ने घर के पास ही मौजूद आशाराम वैदिक इंटर कॉलेज से बारहवी पास की।

बारहवी पास करने के बाद अनिरुद्ध पहुंचे अपने शहर देहरादून के श्री गुरू राम रॉय कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई करने।

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जब जितेंद्र को देखने पहुंच गए Anirudh Agarwal

घर से कॉलेज 40 किलोमीटर दूर था, सो पिता से इजाज़त लेकर इन्होंने कॉलेज के पास ही किराए पर कमरा ले लिया।

लंबे डील डौल के चलते कॉलेज में इनकी अच्छी-खासी चलती थी। ये छात्र राजनीति में भी एक्टिव हो गए।

इसी दौरान फिल्म विश्वास की शूटिंग करने जितेंद्र और अपर्णा विश्वास देहरादून आ गए।

नौजवान अनिरुद्ध अपने दोस्तों के साथ जितेंद्र को देखने के लिए उनके होटल पहुंच गए।

होटल पहुंचे तो देखा, वहां तो ज़बरदस्त भीड़ लगी थी।

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Anirudh Agarwal ने कर लिया एक्टर बनने का फैसला

उस भीड़ को देखकर अनिरुद्ध ने फैसला किया कि वो भी अपने जीवन में कुछ ऐसा ही काम करेंगे।

कि उन्हें देखने के लिए लोग भीड़ लगा लें। फिल्मों का शौक तो इन्हें बचपन से था ही।

और जितेंद्र के प्रति लोगों की दीवानगी देखकर फिल्मों का इनका शौक अब दीवानगी में बदलने लगा।

अनिरुद्ध ने फैसला कर लिया कि वो हीरो बनेंगे। लेकिन इनके पिता जी सख्त थे।

ये जानते थे कि अगर पिताजी से कभी ये बात बताई तो बेहद डांट पड़ेगी। मार भी पड़ सकती है।

इसलिए अपनी ख्वाहिश को दिल में चुपचाप लेकर ये सही वक्त का इंतज़ार करने लगे।

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इंजीनियरिंग में लिया Anirudh Agarwal ने दाखिला

अनिरुद्ध ने कॉलेज में होने वाले इवेंट्स में हिस्सा लेना शुरू कर दिया।

वो नाटकों में भाग लेने लगे।

लेकिन इसी दौरान इनका सिलेक्शन रुढ़की इंजीनियरिंग कॉलेज में हो गया।

वही कॉलेज जो आज आईआईटी रुढ़की के नाम से जाना जाता है।

अनिरुद्ध इंजीनियरिंग करने रुढ़की आ गए।

यहां भी उन्होंने एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेना नहीं छोड़ा।

रुढ़की में इंजीनियरिंग का पहला साल तो आसानी से गुज़र गया।

लेकिन दूसरे साल में मुसीबत आ गई सप्लीमेंट्री के रूप में।

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जब मुंबई भाग गए Anirudh Agarwal

अपनी इंजीनियरिंग के सैकेंड ईयर में सप्लीमेंट्री आने से अनिरुद्ध को काफी झटका लगा था।

उन्होंने कॉलेज में छुट्टी की अपील की ये कहते हुए, कि आगे की पढ़ाई के लिए इन्हें पैसे कमाने हैं।

कॉलेज ने भी इन्हें छुट्टी दे दी। लेकिन ये घर जाने के बजाय सीधा पहुंच गए मुंबई।

मुंबई में ये उतरे दादर स्टेशन पर। और जैसे-तैसे अपने एक पुराने परिचित का इन्होंने घर ढूंढा,

जो कभी देहरादून में ही इनके पास रहा करता था।

वहां कुछ दिन रहने के बाद अनिरुद्ध पहुंच गए अपने बड़े भाई के एक दोस्त के घर।

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सड़क पर आ गए Anirudh Agarwal

इस पूरे वाक्ये के दौरान अनिरुद्ध के घरवाले सिर्फ इतना ही जानते थे कि उनका लड़का कॉलेज से भाग गया है।

उन्हें ज़रा भी इस बात का इल्म नहीं था कि अनिरुद्ध फेल हो चुके हैं।

उधर मुंबई में अनिरुद्ध अपने दोस्त के भाई के घर पर रहते-रहते बोर होने लगे थे और उन्हें शर्मिंदगी भी होने लगी थी।

सो अनिरुद्ध ने वो घर छोड़ दिया और एक गेस्ट हाउस में रहने आ गए।

लेकिन कुछ दिनों बाद जब सारे पैसे खत्म हो गए तो अनिरुद्ध को वो गेस्ट हाउस भी छोड़ना पड़ गया।

सीनियर ने की बुरे वक्त में मदद

गेस्ट हाउस छोड़ने के बाद अनिरुद्ध बड़ी मुसीबत में आ गए।

ना तो उनके पास खाने के लिए कुछ था और ना ही उनके सिर पर छत थी।

कई रातें स्टेशन पर भूखे पेट ही अनिरुद्ध ने गुज़ारी।

लेकिन एक दिन उसी स्टेशन पर अनिरुद्ध को नज़र आया अपने कॉलेज का एक सीनियर।

अनिरुद्ध तुरंत उसके पास पहुंच गया। उसने अनिरुद्ध की हालत देखी तो वो समझ गया कि माजरा क्या है।

तुरंत उस सीनियर ने एक ट्रेन की टिकट खरीदी और वो अनिरुद्ध को अपने साथ अपने घर मेरठ ले आया।

मिथुन से हुई पहली मुलाकात

मेरठ में अपने घर लाकर उस सीनियर ने अनिरुद्ध को नहलाया और दूसरे कपड़े दिए।

और खाना खिलाकर भेज दिया वापस अपने घर देहरादून। अनिरुद्ध देहरादून आग गए।

लेकिन फिल्मों में काम करने की दीवानगी इनके सिर पर अब भी छाई हुई थी।

अनिरुद्ध ने अबकी बार थोड़ी अलग तरह से तैयारी करनी शुरू कर दी।

अनिरुद्ध ने पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट में एप्लाय किया।

इनका इंटरव्यू और ऑडिशन हुआ मुंबई में।

अनिरुद्ध का इंटरव्यू करने आए पैनल में मशहूर एक्टर मिथुन चक्रवर्ती भी थे।

फिर छोड़नी पड़ी मुंबई

इंटरव्यू के दौरान अपनी बातों से अनिरुद्ध ने मिथुन को इतना इंप्रैस कर दिया,

कि इंटरव्यू के खत्म होने तक मिथुन से इनकी तगड़ी दोस्ती हो चुकी थी।

अनिरुद्ध का सिलेक्शन पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट के लिए हो गया।

लेकिन परेशानी अभी खत्म नहीं हुई थी।

घरवालों ने अनिरुद्ध को धमकी दी थी कि उन्हें इंजीनियरिंग ही करनी है,

और अगर इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी नहीं की तो घर से उन्हें एक पैसे की भी मदद नहीं मिलेगी।

मजबूरी के मारे अनिरुद्ध को हारकर फिर से मुंबई छोड़नी पड़ी,

और वापस रुढ़की अपने कॉलेज में लौटना पड़ा।

आखिरकार पास कर ली इंजीनियरिंग

1974 में अनिरुद्ध रुढ़की इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियर बनकर पास आउट हुए। अनिरुद्ध को डिग्री भी मिल गई।

लेकिन मसला ये था कि कॉलेज में जमकर धमा चौकड़ी मचाने वाले अनिरुद्ध की डिग्री के डिसिप्लिन बॉक्स में ज़ीरो लिखा था।

अनिरुद्ध को लगा कि शायद अब उन्हें कोई नौकरी नहीं देगा। और अनिरुद्ध फिर से मुंबई आ गए।

इस दफा अनिरुद्ध अपने एक दोस्त के यहां आकर ठहरे।

उस दोस्त की मदद से अनिरुद्ध मुंबई के बिल्डर्स के साथ कंस्ट्रक्शन के काम में लग गए।

अनिरुद्ध को लगी अजीब बीमारी

छह फीट 4 इंच लंबे अनिरुद्ध ने एक दिन गौर किया कि लोगों ने उनसे डरना शुरू कर दिया है,

और लोग उनसे पास ज़्यादा ठहरते नहीं हैं। अनिरुद्ध समझ नहीं पा रहे थे कि ऐसा आखिर हो क्यों रहा है।

फिर एक दिन शीशे के सामने अपने आप को निहारने पर उन्हें अहसास हुआ कि उनके शरीर के हिस्से अपने आप बड़े होने लगे हैं।

अनिरुद्ध ने देखा कि उनके कान, नाक, पैर और उंगलियां अचानक से और ज़्यादा बढ़ने लगे हैं।

ये देखकर अनिरुद्ध घबरा गए और तुरंत डॉक्टर से मिले।

डॉक्टर ने जांच करके अनिरुद्ध को बताया कि उनकी पिट्यूट्री ग्लैंड में ट्यूमर है और इसी वजह से उनके शरीर के अंग फैलने लगे हैं।

ऐसे मिले रामसे ब्रदर्स से Anirudh Agarwal

अनिरुद्ध अपना इलाज करा ही रहे थे कि इसी दौरान उनकी मुलाकात एक आदमी से हुई।

उस आदमी ने अनिरुद्ध से कुछ देर बात करने के बाद अचानक ही पूछा कि क्या तुम फिल्मों में काम करना पसंद करोगे।

शुरूआत में तो अनिरुद्ध को लगा कि शायद ये आदमी उनका मज़ाक उड़ा रहा है।

लेकिन थोड़ी देर बाद ही उन्हें अहसास हो गया कि वो आदमी सीरियसली उनसे पूछ रहा था।

बस फिर क्या था, एक्टर बनने का अनिरुद्ध का पुरना सपना एक बार फिर से हिलोरे मारने लगा।

अनिरुद्ध ने जवाब दिया, हां, क्यों नहीं। अगर मौका मिलेगा तो बिल्कुल करूंगा।

उस आदमी ने अनिरुद्ध से कहा कि उनको जल्द से जल्द रामसे ब्रदर्स से जाकर मिलना चाहिए।

उसके कहने पर अनिरुद्ध अगले ही दिन रामसे ब्रदर्स के ऑफिस पहुंच गए।

और फिर जो अनिरुद्ध के साथ वहां हुआ, उसके बारे में तो उन्होंने कभी अपने सपने में भी नहीं सोचा था।

पुराना मंदिर में हुआ Anirudh Agarwal का सिलेक्शन

उस दौर में रामसे ब्रदर्स की जोड़ी अपनी हॉरर फिल्मों के लिए मशहूर थी।

अनिरुद्ध से मिलने से पहले रामसे ब्रदर्स दो गज़ ज़मीन के नीचे,

और कौन व दरवाज़ा नाम की फिल्में बना चुके थे।

पुराना मंदिर नाम की उनकी फिल्म की शूटिंग भी लगभग कंप्लीट हो चुकी थी।

केवल शैतान वाला हिस्सा शूट करना बाकी था।

रामसे ब्रदर्स को पुराना मंदिर में शैतान के रोल के लिए एक ऐसे शख्स की तलाश थी,

जिसकी काया दिखने में एकदम शैतान जैसी ही हो।

इसी बीच अनिरुद्ध उनके ऑफिस पहुंच गए।

जैसे ही रामसे ब्रदर्स ने अनिरुद्ध को देखा, वो खुशी के मारे पागल हो उठे।

पुराना मंदिर के शैतान वाले सीन्स के लिए जिस भयानक चेहरे की तलाश में वो कई दिनों से थे

और लगभग हार मानने वाले ही थे, अनिरुद्ध को देखते ही उन्हें यकीन हो गया कि उनकी तलाश अब खत्म हो गई।

बदलने लगी Anirudh Agarwal की किस्मत

पुराना मंदिर आखिरकार 1984 में रिलीज़ हो गई और सुपरहिट रही।

फिल्म में अनिरुद्ध के शैतानी किरदार का नाम था सामरी और ये किरदार लोगों को बेहद पसंद आया था।

ये कैरेक्टर इतना मशहूर हुआ था कि इसी को सेंट्रल में रखते हुए रामसे ब्रदर्स ने सामरी थ्री डी नाम से एक और फिल्म बना दी।

उस वक्त अनिरुद्ध फिल्मों में अपना नाम अजय अग्रवाल लिखाया करते थे।

उन्हें लगता था कि अनिरुद्ध नाम काफी भारी भरकम है और लोगों को शायद ये नाम आसानी से याद भी ना रहे।

ऐसे बने बाबू गुज्जर 

ये भी अनोखी बात है कि जिस रामसे ब्रदर्स की जोड़ी ने अनिरुद्ध को फिल्मों में काम दिया,

उनके साथ इन्होंने केवल तीन फिल्मों में ही काम किया था।

अनिरुद्ध ने फिल्मों के साथ-साथ अपना कंस्ट्रक्शन का बिजनेस भी शुरू कर दिया था।

और इसी दौरान शेखर कपूर ने अपनी फिल्म बैंडिट क्वीन के लिए अनिरुद्ध को भी अप्रोच किया।

इतने बड़े डायरेक्टर की फिल्म में काम करने का मौका भला अनिरुद्ध कैसे छोड़ते।

इसलिए रामसे ब्रदर्स का साथ छोड़ते हुए अनिरुद्ध बैंडिट क्वीन का हिस्सा बने,

और फिल्म में उन्होंने बाबू गुज्जर का रोल निभाया था।

ऐसा रहा इनका फिल्म सफर

इस बात से तो बेहद कम लोग वाकिफ हैं कि अनिरुद्ध ने जंगल बुक नाम की एक हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया था।

इस फिल्म की शूटिंग के लिए अनिरुद्ध तीन महीनों के लिए अमेरिका भी गए थे।

ये फिल्म बनाई थी स्टीफन समर्स ने और अनिरुद्ध ने इस फिल्म में तबाकी का रोल किया था।

इसके बाद अनिरुद्ध को उस शख्सियत के साथ काम करने का मौका मिला,

जिससे प्रेरित होकर उन्होंने फिल्मों में काम करने का ख्वाब बुना था।

जी हां, जितेंद्र। अनिरुद्ध ने जितेंद्र के साथ फिल्म मर मिटेंगे में काम किया था।

इस फिल्म में मिथुन भी थे जिनसे अनिरुद्ध की काफी अच्छी बनती थी।

अपने फिल्मी करियर में अनिरुद्ध ने अमिताभ बच्चन के साथ आज का अर्जुन और जादूगर फिल्म में काम किया।

अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ के साथ राम लखन में काम किया।

आमिर खान के साथ मेला में इन्होंने काम किया जिसे काफी पसंद किया गया था।

और इसके अलावा अक्षय कुमार के साथ फिल्म तलाश में भी इन्होंने काम किया था।

अनिरुद्ध की आखिरी फिल्म थी साल 2007 में रिलीज़ हुई फिल्म बॉम्बे टू गोवा।

इनसे हुई थी Anirudh Agarwal की शादी

अनिरुद्ध की शादी का किस्सा भी दिलचस्प है।

जब इनका कंस्ट्रक्शन का काम चलने लगा तो घरवालों ने इन पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

घरवालों की ज़िद को अनिरुद्ध ने मान लिया और शादी के लिए हां कर दी।

सहारनपुर की एक लड़की नीलम को अनिरुद्ध के घरवालों ने इनके लिए चुन लिया।

शादी से पहले ना तो अनिरुद्ध ने कभी अपनी बीवी को देखा था और ना ही उनकी बीवी ने इन्हें। इनके दो बच्चे हुए।

बच्चों की खातिर छोड़ दिया हॉलीवुड 

हॉलीवुड फिल्म जंगल बुक में काम करने के बाद इनके पास और भी ढेरों तगड़े ऑफर्स हॉलीवुड से आए थे।

लेकिन अपने बच्चों की खातिर इन्होंने वो सारे ऑफर्स ठुकरा दिए।

इनका बेटा असीम अग्रवाल 2006 में आई फिल्म फाइट क्लब मेंबर्स ओनली में काम कर चुके हैं।

वहीं इनकी बेटी कपिला ने भी 2005 में आई बंटी और बबली में काम किया है।

बाद में ये दोनों अमेरिका पढ़ाई करने चले गए और फिर शादी करके वहीं सेटल भी हो गए।

जबकि अनिरुद्ध आज भी अपनी पत्नी के साथ मुंबई में ही रहते हैं।

भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से भी जुड़े Anirudh Agarwal

मेला फिल्म के बाद अनिरुद्ध भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के साथ बतौर सिविल कंस्ट्रक्टर जुड़ गए थे।

इस काम में अनिरुद्ध इतने बिज़ी हो गए कि फिल्मों से उनकी दूरी बढ़ने लगी।

मेला के बाद इनकी दो तीन फिल्में और रिलीज़ हुई थी।

और फिर आखिरकार अनिरुद्ध ने फिल्मों से खुद को पूरी तरह से अलग कर लिया।

भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर में बिज़ी होने के अलावा अनिरुद्ध के पास फिल्में छोड़ने की एक और वजह थी।

अपनी फिल्में ही नहीं थी पसंद

अनिरुद्ध ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें अपनी फिल्में देखना बिल्कुल भी पसंद नहीं था।

उस इंटरव्यू में अनिरुद्ध ने कहा था, “मज़ा नहीं आता। मैं तो कुछ अलग करना चाहता था

जहां मुझे थोड़ी मेहनत करनी पड़ती और उर्जा खर्च करनी पड़ती।

लेकिन किसी को भी ये नहीं लगा कि मैं इस तरह के रोल्स से अलग भी कुछ कर सकता हूं।

कोई भी मुझे एक नॉर्मल इंसान के तौर पर अपनी फिल्मों में नहीं लेता था।”

पब्लिक में ही खो गया ये पब्लिक फिगर

सामरी और नेवला अनिरुद्ध के निभाए दो सबसे ज़्यादा पसंद किए गए कैरेक्टर्स थे।

लेकिन अनिरुद्ध को अपने ये कैरेक्टर्स बिल्कुल भी पसंद नहीं थे।

बकौल अनिरुद्ध, वो एक पब्लिक फिगर थे और एक दिन पब्लिक में ही कहीं खो गए।

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