नौवां भाग: जब भारत में नौकरी करने आई अमेरिकी लड़की कैथी ने अकेले की भारतीय रेल में पहली यात्रा

American Girl in India, सांकेतिक तस्वीर - Photo Courtesy: Pixabay

हैलो फ्रैंड्स, कैसे हैं आप सभी। पिछली कहानी में मैंने आपको अपनी फ्रेंड डी से मिलवाया था। डी भी मेरी तरह अमेरिका से ही है और वो भी इंडिया में ही रहती है। उसने यहां इंडिया में शादी कर ली है और वो अहमदाबाद से थोड़ी दूर बसे एक शहर अंकलेश्वर में रहती है। अगर आप चाहें तो इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में जाकर डी और मेरी पहली मुलाकात की कहानी देख सकते हैं।

दो हफ्ते पहले डी मुझसे मिलने अंकलेश्वर से अहमदाबाद आई थी। अब मेरी बारी थी डी से मिलने के लिए अहमदाबाद से अंकलेश्वर जाने की। मैंने भी ट्रेन से ही अहमदाबाद से अंकलेश्वर तक जाने का फैसला किया।

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इंडिया के लोग डराते बहुत हैं।

इस जर्नी में कुल साढ़े तीन घंटे का ही समय लगना था। मैंने जब ये बात अपने ऑफिस के कुछ कलीग्स से बताई तो उन्होंने मुझे आगाह किया कि ट्रेन में विदेशियों का सफर करना सेफ नहीं है। हद है। यहां लोग हमेशा बस डराते ही रहते हैं। कुछ लोगों ने तो ये भी कहा अंकलेश्वर काफी ज़्यादा पॉल्यूटेड है और हो सकता है कि डी के ससुराल वाले तुम्हारा उनके घर आना पसंद ना करें। लेकिन मैं फैसला कर चुकी थी।

American Girl in India, सांकेतिक तस्वीर – Photo Courtesy: Pixabay

स्लीपर क्लास का मेरा पहला सफर।

ये लोग नहीं जानते थे कि डी यहां इंडिया में काफी बोरियत महसूस कर रही है और वो चाहती है कि मैं भी उसके पास आऊं। मैंने अहमदाबाद से अंकलेश्वर तक के लिए स्लीपर क्लास में सीट बुक करा ली। इसमें एसी तो नहीं है लेकिन विंडोज़ ओपन हैं। इसका किराया भी बेहद सस्ता है। कुल 130 रुपए। देखा जाए तो 4 डॉलर्स से भी कम। 

American Girl in India, सांकेतिक तस्वीर – Photo Courtesy: Pixabay

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ट्रेन में मिले कई दोस्त।

मैं एसी का किराया भी अफोर्ड कर सकती थी। लेकिन अच्छा हुआ मैंने एसी कोच में सफर ना करने का फैसला किया। और मैं खुद को अपल मिडिल क्लास इंडियस सोसायटी से अलग भी करना चाहती थी। मेरे ऑफिस के सभी लोग गलत साबित हुए। ट्रेन में जितने भी मेरे फैलो पैसेंजर्स थे, सब काफी फ्रेंडली थे। ट्रेन में मेरे कई दोस्त भी बने और मैंने उनके लिए चाय भी खरीदी। 

American Girl in India, सांकेतिक तस्वीर – Photo Courtesy: Pixabay

और मैं पहुंच गई।

तय वक्त पर मैं अंकलेश्वर पहुंच गई। अंकलेश्वर एक छोटा शहर है। लोग इसे गांव कहते हैं, जबकि यहां की आबादी साठ हज़ार से भी ज़्यादा है। ये शहर अपने कैमिकल प्लांट्स और ऑयल रिफाइनरीज़ के लिए मशहूर है। अहमदाबाद में मुझे लोग कह रहे थे कि ये काफी पॉल्यूटेड शहर है। जबकि मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा। मुझे कुछ देर स्टेशन के बाहर डी का इंतज़ार करना पड़ा। फायनली डी मुझे लेने स्टेशन आ गई। हम गले मिले और उसके घर के लिए चल दिए।

American Girl in India, सांकेतिक तस्वीर – Photo Courtesy: Pixabay

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अटैंड की पंजाबी सगाई सेरेमनी

डी की ससुराल एक पंजाबी फैमिली है। मैंने उनके घर ढेर सारा मज़ेदार फूड खाया। थैंक गॉड कि ये लोग नॉनवेज भी खाते हैं। जब मैं और डी हिंदी की प्रैक्टिस कर रहे थे तो वे लोग काफी हंस रहे थे। हमें टूटी-फूटी हिंदी बोलते देखने में उन्हें काफी मज़ा आ रहा था। जिस दिन मैं डी के घर पहुंची थी उसके अगले दिन उनके पड़ोस में एक इंगेजमेंट सेरेमनी थी। मैंने भी उनकी फैमिली के साथ वो सेरेमनी अटैंड की। ये सेरेमनी एक मंदिर में थी जिसे ये लोग गुरूद्वारा कह रहे थे। मैंने अमेरिका में भी सुना था कि वहां भी कई गुरूद्वारे हैं। डी ने बताया कि उसकी शादी भी इसी गुरूद्वारे में हुई थी।

American Girl in India, सांकेतिक तस्वीर – Photo Courtesy: Pixabay

मुझे पसंद आया अंकलेश्वर

सेरेमनी अटैंड करने के बाद मैं डी के साथ वापस उसके घर लौट आई। उसके बाद शाम को डी ने मुझे रोटी और परांठा बनाना सिखाया। मुझे तो लग रहा है जैसे अहमदाबाद पहुंचकर मुझे अपने लिए भी रोटी बनानी ही चाहिए।  सच कहूं तो अंकलेश्वर आने से पहले मैं इंडिया में बोर होना शुरू हो चुकी थी। मेरा दिल कर रहा था कि वापस फिलाडेल्फिया लौट जाऊं। लेकिन अंकलेश्वर आकर मुझे काफी अच्छा लगा। हालांकि ये कोई टूरिस्ट प्लेस नहीं है। पर मेरे लिए तो एकदम नहई जगह है और मुझे नई जगहें देखने का काफी शौक है। मुझे इंडियन फैमिलीज़ की जैनुअन गुडनेस भी काफी पसंद आई।

American Girl in India, सांकेतिक तस्वीर – Photo Courtesy: Pixabay

तीसरे दिन मैं डी के घर से वापस अहमदाबाद लौट आई और अब मेरा इंडिया छोड़ने का इरादा बदल चुका है। ये कहानी बस यहीं तक। दूसरी कहानी के साथ जल्द मिलेंगे। बाय बाय।

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