August 5, 2021

Ranjeet Biography: कैसे Gopal Bedi बना इतना बड़ा Bollywood Villain Ranjeet?

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Photo: Social Media

Ranjeet. बॉलीवुड का ऐसा विलेन जिसने हर किसी को डराया। खासतौर पर महिलाओं को। सिल्वर स्क्रीन पर इन्होंने एक से बढ़कर एक बुरे और भयानक काम किए। अगर असलियत में लोग इन्हें देख लेते थे तो इनसे चार हाथ बचकर चला करते थे। ये कितने खूंखार विलेन थे इसका अंदाज़ा ऐसे भी लगाया जा सकता है कि शोले फिल्म के विलेन गब्बर के रोल के लिए रंजीत का नाम लगभग फाइनल ही हो गया था।

Modern Kabootar पर पेश है हिंदी सिनेमा के खतरनाक विलेन Ranjeet की कहानी। Ranjeet कैसे दिल्ली से मुंबई आए और इनका फिल्मी सफर कैसा रहा, आज ये सारी कहानी हम और आप जानेंगे।

Ranjeet की शुरूआती ज़िंदगी

रंजीत का जन्म हुआ था 12 सितंबर 1942 को पंजाब के अमृतसर के पास मौजूद एक छोटे से गांव जंदियाला गुरू में। माता-पिता ने इनका नाम रखा था गोपाल। इस तरह इनका पूरा नाम था गोपाल बेदी। इनका परिवार उस इलाके का जाना-माना परिवार था। इनके दादा एक बिजनेसमैन थे।

देश की आज़ादी के वक्त जब दंगों की आग भड़की तो अमृतसर भी उस आग की तपिश पहुंची थी। बढ़ते दंगों से परेशान होकर रंजीत के पिता अपने चारों बच्चों और बाकी परिवार को लेकर दिल्ली आ गए।

फुटबॉलर थे Ranjeet

इस तरह रंजीत के बचपन का काफी हिस्सा दिल्ली में ही गुज़रा और इनकी पढ़ाई-लिखाई भी दिल्ली में ही हुई। स्कूल के दिनों से ही रंजीत ने फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था। चूंकि ये एक गोलकीपर थे तो प्यार से इनके दोस्त इन्हें गोली कहकर पुकारा करते थे।

फुटबॉल के चलते ही रंजीत को हिंदू कॉलेज में दाखिला मिला था। वहीं दूसरी तरफ इनके पिता जो कि अमृतसर में कपड़ों का व्यापार किया करते थे वो अब दिल्ली में इलैक्ट्रॉनिक गुड्स का व्यवसाय करने लगे थे।

जब Indian Airforce में भर्ती हुए Ranjeet

रंजीत जब हिंदू कॉलेज पहुंचे ही थे तो एक दिन इन्होंने अखबार में इंडियन एयर फोर्स का रिज़ल्ट देखा। किसी ने इनसे कहा कि ये काफी टफ एग्ज़ाम होता है और बहुत ही कम बच्चे इस एग्ज़ाम में सफलता हासिल कर पाते हैं।

तब रंजीत और उनके कुछ दोस्तों ने पैसों का इंतज़ाम करके इंडियन एयर फोर्स का फॉर्म भर दिया। किस्मत ने इनका साथ दिया और ये व इनके अन्य तीन दोस्त एयर फोर्स की लिखित परीक्षा में पास हो गए।

इसके बाद फाइनल सिलेक्शन के लिए इन्हें जबलपुर बुलाया गया जहां इनका एक दोस्त मेडिकल टेस्ट में फेल हो गया। लेकिन रंजीत व इनके बाकी दो दोस्तों को पायलट ट्रेनिंग के लिए चुन लिया गया।

इनके घर वालों को अब तक नहीं मालूम था कि उनका बेटा एयरफोर्स में पायलट बनने के लिए सिलेक्ट हो गया है। एयरफोर्स की तरफ से जब पिताजी के पास एक बॉन्ड पहुंचा तब जाकर इनके परिवार को जानकारी मिली और इनका परिवार बेहद खुश हुआ।

एयरफोर्स से निकाले गए Ranjeet

ट्रेनिंग के लिए रंजीत उर्फ गोपाल बेदी को कोयंबटूर भेजा गया। लेकिन महज़ पांच महीनों की ट्रेनिंग के बाद ही रंजीत को एयरफोर्स से निकाल दिया गया। हुआ दरअसल यूं कि कोयंबटूर में जो इनके इंस्ट्रक्टर थे उनकी बेटी से इनका अफेयर शुरू हो गया। फिर ये ट्रेनिंग पर कम और उस लड़की के साथ ज़्यादा मशगूल रहने लगे। इस बात की खबर जैसे ही इनके इंस्ट्रक्टर को हुई तो वो इन पर बेहद नाराज़ हुए।

उन्होंने अपनी बेटी से अफेयर को लेकर इन्हें काफी डांटा। नौैजवान रंजीत भी काफी गर्म हो गए और इन्होंने भी अपने उस ट्रेनर को काफी खरी-खोटी सुनाई। इस पर उस इंस्ट्रक्टर ने इनके खिलाफ डिसीप्लीनरी एक्शन लिया और बैड बिहेयिवर बताकर इन्हें एयरफोर्स से निकलवा दिया। ये वापस अपने घर दिल्ली आ गए।

पहली बार देवानंद साहब की फिल्म देखी 

दिल्ली वापस आकर ये अक्सर हिंदू कॉलेज के अपने दोस्तों से मिलने जाया करते थे। उस वक्त रंजीत को नहीं पता था कि उनकी किस्मत उन्हें फिल्म इंडस्ट्री लेकर जाने वाली है इसीलिए उन्हें एयरफोर्स से निकलना पड़ा। आपको जानकर हैरानी होगी कि अपने करियर में 500 से ज़्यादा फिल्मों में काम करने वाले रंजीत कभी फिल्म देखने के शौकीन नहीं रहे। कॉलेज के दिनों में भी फिल्में देखने से ज़्यादा पसंद इन्हें फुटबॉल खेलना था।

लेकिन एक दफा दोस्तों के ज़िद करने पर ये गाइड फिल्म देखने सिनेमा हॉल चले गए। गाइड वो पहली फिल्म थी जो इन्होंने देखी थी। गाइड के बाद इनके दोस्त इन्हें देवानंद साहब की ही एक और फिल्म हम दोनों दिखाने ले गए।

रंजीत को गाइड और हम दोनों में देवानंद साहब की एक्टिंग बेहद पसंद आई। देवानंद की पर्सनैलिटी से ये खासे मुतास्सिर हुए। लेकिन इनके ज़ेहन में दूर-दूर तलक भी ये ख्याल नहीं था कि इन्हें भी फिल्मों में काम करना चाहिए।

जब Ranjeet को मिला फिल्म का ऑफर

इत्तेफाक से एक दिन ये अपने एक दोस्त के घर गए थे। इनके दोस्त के घर कुछ मेहमान पहले से ही मौजूद थे। उन्हीं मेहमानों में से ने इनकी पर्सनैलिटी से इंप्रैस होते हुए इनसे पूछा कि क्या ये फिल्मों में काम करना चाहेंगे।

फिल्मों में काम देने का ऑफर इन्हें जिस शख्स ने दिया था उसका नाम रणवीर सिंह था और वो मूलरूप से राजस्थान के कोटा का रहने वाला था। हालांकि वो ब्रिटेन में रहता था और वहां फिल्म इंडस्ट्री में काफी एक्टिव था। रणवीर की हॉलीवुड और बॉलीवुड में अच्छी जान-पहचान थी।

Ranjeet को मिला लीड किरदार

शुरू में तो रंजीत को लगा कि ये कोई फर्ज़ी इंसान है जो उन्हें फिल्मों में काम करने का सपना दिखाकर उनसे कुछ लूटना चाहता है। लेकिन जब रणवीर सिंह ने रंजीत को दिल्ली स्थित अपने होटल में आने का ऑफर दिया तो रंजीत ने वो ऑफर स्वीकार कर लिया।

अगले दिन ये रणवीर सिंह से मिलने उस होटल पहुंच गए। होटल में रणवीर सिंह ने इन्हें डिनर कराया और एक फिल्म की कहानी इन्हें सुनाई जो कि ट्रक वालों के जीवन पर आधारित थी। रणवीर ने इन्हें उस फिल्म में लीड रोल ऑफर किया।

एक चिट्ठी ने बदल दी Ranjeet की ज़िंदगी

इन्हें लगा कि ये सब बस यूं ही चल रहा है और ऐसा कभी नहीं होगा कि कोई इन्हें फिल्म में काम दे। इसलिए मज़ाक मज़ाक में रंजीत ने वो ऑफर स्वीकार कर लिया। लेकिन इसी बीच रणवीर सिंह को मुंबई जाना पड़ा और कई महीनों तक रणवीर ने रंजीत से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं किया। रंजीत को लगा कि शायद रणवीर ने उन्हें फिल्म में लेने का इरादा छोड़ दिया है।

लेकिन फिर एक दिन रणवीर की एक चिट्ठी इन्हें मिली जिसमें लिखा था कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग इन्हें सलाह दे रहे हैं कि फिल्म में नए हीरो को लेने की जगह किसी इस्टैब्लिश एक्टर के साथ फिल्म बनाओ। इसलिए तुम फिल्म में कोई दूसरा रोल कर लो। अगर तुम फिल्म में काम करना चाहते हो तो मुंबई आ जाओ।

और मुंबई पहुंच गए Ranjeet

चूंकी रंजीत उन दिनों कुछ नहीं कर रहे थे सो घर वालों से मुंबई घूमने जाने का बहाना करके वो रणवीर के पास मुंबई में पहुंच गए जो कि उन दिनों चेतन आनंद के घर पर ठहरे थे। रणवीर ने इनके ठहरने का इंतज़ाम भी चेतन आनंद के घर पर ही किया। कुछ दिन चेतन आनंद के घर रहने के बाद रंजीत को एक होटल में ठहराया गया।

इस दौरान रणवीर के साथ रंजीत लगातार चेतन आनंद के घर आते रहते थे। यहीं पर रंजीत की मुलाकात महान सुनील दत्त साहब से हुई थी। सुनील दत्त रंजीत से पहली मुलाकात से ही काफी इंप्रैस हो गए और उन्होंने फैसला कर लिया कि एक दिन इस लड़के को अपनी किसी फिल्म में ज़रूर लेंगे।

फिर ऐसा भी हुआ Ranjeet के साथ

रंजीत को मुंबई आए हुए काफी वक्त हो चुका था। इस बीच सुनील दत्त साहब से रंजीत की अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी। रंजीत अक्सर दत्त साहब के साथ बैडमिंटन खेला करते थे और उनके साथ ही वो घुड़सवारी भी सीखने जाया करते थे। रंजीत को लग रहा था कि किसी ना किसी दिन उनकी फिल्म की शूटिंग शुरू हो ही जाएगी।

उस फिल्म में जहां पहले रंजीत लीड रोल करने वाले थे वहीं अब रणवीर ने संजय खान को लीड कैरेक्टर के लिए साइन कर लिया था और रंजीत को एक ग्रे शेड कैरेक्टर प्ले करने को दिया गया था। रंजीत ने बिना किसी झिझक के वो किरदार साइन भी कर लिया था।

लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि रंजीत को मुंबई छोड़कर दिल्ली अपने घर वापस जाने की तैयारी शुरू करनी पड़ गई। रंजीत बेहद दुखी थे। वो फिल्मों में काफी दिलचस्पी लेने लगे थे। लेकिन उन्हें लगा जैसे सब खत्म हो गया है।

बंद हो गई रंजीत की पहली फिल्म

रणवीर ने जिस फिल्म के लिए रंजीत को साइन किया था और दिल्ली से मुंबई बुलाया था उसकी शूटिंग अभी शुरू भी नहीं हुई थी कि फिल्म में पैसा लगाने वाले फाइनेंसर्स ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। ये खबर रणवीर के लिए जितनी बुरी थी उससे कहीं ज़्यादा सदमा इस खबर ने रंजीत को दिया था। रणवीर ने रंजीत से कहा कि वो लंदन जा रहे हैं और वहां से पैसों का इंतज़ाम करके वो इस फिल्म को बनाएंगे।

दिलीप कुमार के घर भी रहे Ranjeet

अब तक रंजीत होटल से निकलकर एक बंगले में रहा करते थे जो कि रणवीर ने किराए पर लिया था। और चूंकि रणवीर ने रंजीत को फिल्म के लिए साइन कर लिया था तो वो हर महीने सात सौ रुपए रंजीत को चुकाया भी करते थे। इससे मुंबई में रंजीत का खर्च आसानी से चल रहा था। लेकिन रणवीर के जाने के बाद रंजीत को वो बंगला खाली करना पड़ा जो रणवीर ने किराए पर लिया था।

अब रंजीत के सामने समस्या थी कि वो रहेंगे कहां। वो सोच रहे थे कि जल्द से जल्द ट्रेन की टिकट कराकर दिल्ली वापस चले जाएंगे। वो इसी कशकमश में फंसे थे कि महान दिलीप कुमार के छोटे भाई ने उन्हें अपने घर में ठहरने का ऑफर दिया। रंजीत कुछ दिनों तक दिलीप साहब के घर भी रहे।

Ranjeet दिल्ली लौटने की तैयारी करने लगे

अब तक रंजीत ये इरादा कर चुके थे कि जल्द ही वो वापस अपने घर दिल्ली लौट जाएंगे। हालांकि रंजीत की अच्छी जान-पहचान फिल्म इंडस्ट्री में बन चुकी थी। लेकिन रंजीत ने सबसे मिलना बंद कर दिया था। वो अपने घर वापस जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान सुनील दत्त साहब फिल्म रेशमा और शेरा की शूटिंग शुरू करने जा रहे थे।

सुनील दत्त साहब के मैनेजर ने दी गुड न्यूज़

एक दिन रंजीत दिलीप साहब के घर के पास मौजूद एक रेस्टोरेंट में खाना खा रहे थे कि तभी वहां एक लड़का इनसे मिलने आया। मुंबई में रहने के दौरान ही रंजीत साहब की उस लड़के से अच्छी जान-पहचान हो गई थी।

वो लड़का रंजीत साहब के पास आया और इनसे बोला,”दत्त साहब रेशमा और शेरा फिल्म बना रहे हैं। यार तुम्हारी तो दत्त साहब से बहुत बढ़िया जान-पहचान है। उनसे बात करके अगर तुम मुझे रेशमा और शेरा में कहीं भी फिट करा दो तो तुम्हारा बड़ा अहसान होगा और मेरा कम से कम साल भर का खर्चा चल जाएगा।”

चूंकि रंजीत उस लड़के को अपना दोस्त मानते थे तो ना चाहते हुए भी उन्होंने उस लड़के की मदद करने का फैसला कर लिया। एक दिन वक्त निकालकर उस लड़के के लिए बात करने रंजीत साहब सुनील दत्त साहब के ऑफिस पहुंच गए।

रंजीत साहब को देखकर दत्त साहब के मैनेजर ने इन्हें बताया कि सुनील दत्त साहब कब से इन्हें तलाश रहे हैं। वो अपनी फिल्म रेशमा और शेरा में इन्हें वहीदा रहमान के भाई के रोल में लेना चाहते हैं।

मोहन सहगल भी Ranjeet को ढूंढ रहे थे

रंजीत ने जब मैनेजर से दत्त साहब के बारे में पूछा तो उसने बताया कि फिलहाल वो चेन्नई गए हैं। रंजीत ने दत्त साहब के मैनेजर से अपने जानकार उस लड़के की सिफारिश की जो उन्हें रेस्टोरेंट में मिला था। उस लड़के को रेशमा और शेरा के क्र्यू में शामिल कर लिया गया।

इसी दौरान दत्त साहब के डायरेक्टर ने रंजीत को ये भी बताया कि मशहूर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर मोहन सहगल भी एक दिन फोन करके उनके बारे में पूछ रहे थे और कह रहे थे कि रंजीत मिले तो कहना कि मोहन सहगल से आकर जल्द से जल्द मिले।

जर्मनी नहीं गए Ranjeet

चूंकि मोहन सहगल से भी रंजीत की अच्छी जान-पहचान हो चुकी थी तो वो समझ गए थे कि ज़रूर मोहन सहगल भी किसी फिल्म में उन्हें लेना चाहते होंगे। रंजीत अब काफी कन्फ्यूज़ हो गए थे। रंजीत की कनफ्यूज़न की वजह थी कि एक तो वो फिल्मों में काम करने के लिए पागल नहीं थे। दूसरे उनके पिता उन्हें नौकरी के लिए जर्मनी भेजने का पूरा इंतज़ाम कर चुके थे।

रंजीत समझ नहीं पा रहे थे कि फिल्मों में करियर बनाया जाए या फिर जर्मनी जाया जाए। आखिरकार रंजीत ने फैसला किया कि किसी की नौकरी करने जर्मनी जाने से बेहतर है कि फिल्मों में खुद को एक मौका दिया जाए। अगर फिल्मों में बात नहीं बनी तो वो वापस दिल्ली जाकर अपने पिता के बिजनेस में उनका हाथ बंटाना शुरू कर देंगे।

और शुरू हो गया Ranjeet का फिल्मी सफर

रंजीत मोहन सहगल से जाकर मिले और मोहन सहगल ने रंजीत को अपनी फिल्म सावन भादो में दामू के रोल में ले लिया। उधर दत्त साहब ने भी रेशमा और शेरा में रंजीत को साइन कर लिया। इस तरह रंजीत का फिल्मी करियर दो बड़ी फिल्मों के साथ धूमधाम से शुरू हुआ। यूं तो इनके करियर की पहली फिल्म रेशमा और शेरा थी। इसी फिल्म में सुनील दत्त साहब ने इनका नाम गोपाल बेदी से बदलकर रंजीत रखा था।

लेकिन इनकी पहली रिलीज़्ड फिल्म मोहन सहगल की सावन भादो रही। यहां गौर करने वाली बात ये है कि अपनी शुरूआती दोनों फिल्मों में रंजीत ने पॉज़िटिव रोल निभाए थे। यानि बॉलीवुड का ये बैड बॉय करियर की शुरूआत में गुड बॉय था। लेकिन फिर वो फिल्म आई जिसमें पहली दफा रंजीत उस किरदार में दिखे जिसने इनके मां-बाप को बड़ा गहरा सदमा दिया।

माता-पिता ने घर से रंजीत को निकाल दिया

साल 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म शर्मीली में ये विलेन के रोल में दिखे। फिल्म के एक सीन में ये राखी के कपड़े फाड़ने की कोशिश करते हुए नज़र आते हैं। जब ये फिल्म बनकर तैयार हुई और दिल्ली में इसका प्रीमियर हुआ तो इनका पूरा परिवार ये फिल्म देखने आया।

फिल्म में जैसे ही वो सीन आया जिसमें रंजीत राखी के कपड़े फाड़ने की कोशिश कर रहे हैं तो इनके परिवार को बेहद बुरा लगा। वो उसी वक्त फिल्म छोड़कर घर वापस चले गए। इसके बाद जब रंजीत घर पहुंचे तो इनकी मां ने इनसे साफ कह दिया कि इन्हें अब इस घर में आने की कोई ज़रूरत नहीं है। ये चुपचाप इस घर से निकल जाएं।

राखी को बीच में आना पड़ा

मां ने इनसे कहा कि फिल्म में इन्होंने जैसी शर्मनाक हरकत की है उससे वो किसी को भी मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहे हैं। तब परिवार की गलतफहमी दूर करने के लिए रंजीत साहब ने अभिनेत्री राखी को अपने घर बुलाया। राखी ने रंजीत के माता-पिता और परिवार वालों को समझाया कि वो तो महज़ एक फिल्म की शूटिंग थी और असल में रंजीत ने उनके साथ कभी किसी तरह की बदतमीज़ी नहीं की। तब जाकर इनके घरवाले माने।

डायरेक्शन भी किया रंजीत ने

शर्मीली फिल्म के बाद इनका करियर चल निकला और इन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया। अपने करियर में इन्होंने 500 से भी ज़्यादा फिल्मों में काम किया। और केवल फिल्मों में ही नहीं, इन्होंने टीवी पर भी काफी काम किया और टीवी पर भी इनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया। नब्बे के दशक की शुरूआत में रंजीत ने डायरेक्शन में भी हाथ आज़माया।

कारनामा और गज़ब तमाशा नाम की दो फिल्मों को इन्होंने डायरेक्ट किया था। गज़ब तमाशा के तो प्रोड्यूसर भी ये खुद ही थे। हालांकि ये दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा सकी और रंजीत का डायरेक्टर बनने का सपना इन दोनों फिल्मों के बाद बुरी तरह टूट गया।

ऐसी है इनकी निज़ी ज़िंदगी

बात अगर रंजीत की निज़ी ज़िंदगी के बारे में करें तो रंजीत ने नाज़नीन नाम की महिला से शादी की है। रंजीत से शादी करने के बाद नाज़नीन ने अपना नाम बदलकर आलोका रख लिया था। इस जोड़ी के दो बच्चे हैं। बेटी दिव्यांका और बेटा चिरंजीव। इनकी बेटी दिव्यांका एक फैशन डिज़ायनर हैं और बेटा चिरंजीव मोटर स्पोर्ट्स में करियर बनाने की कोशिश कर रहा है।

ऐसा भी हुआ है रंजीत के साथ

एक इंटरव्यू में रंजीत ने बताया था कि उनकी बेटी दिव्यांका ने नोएडा से फैशन डिज़ायनिंग का कोर्स किया है। वो जब भी अपनी बेटी से मिलने नोएडा जाते थे तो बेटी के साथ किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते थे। एक कम उम्र की लड़की को रंजीत के साथ देखकर लोग अक्सर मुंह बनाया करते थे।

लोगों को लगता था कि रंजीत किसी कम उम्र की लड़की को डेट करने आए हैं। रंजीत को जब अहसास हुआ कि लोग उन्हें और उनकी बेटी को देखकर गलतफहमी पालने लगे हैं तो लोगों की गलतफहमी दूर करने के लिए वो वेटर से ज़ोर से कहते थे कि जो भी मेरी बेटी ऑर्डर दे वही लेकर आ जाओ।

राजेश खन्ना की साली से रह चुका है रिलेशन

नाज़नीन से शादी करने से पहले रंजीत का अफेयर डिंपल कपाड़िया की बहन यानि राजेश खन्ना साहब की साली सिंपल कपाड़िया से भी रह चुका था। दोनों एक-दूसरे को बेहद पसंद भी करते थे। लेकिन राजेश खन्ना रंजीत को ज़रा भी पसंद नहीं करते थे। वो नहीं चाहते थे कि उनकी साली सिंपल रंजीत के चक्कर में ज़रा भी पड़ें।

जब मीडिया में रंजीत और सिंपल के अफेयर के चर्चे काफी ज़्यादा होने लगे तो राजेश खन्ना से नहीं रहा गया और उन्होंने एक दिन सिंपल को खूब डांटा। फिल्म छैला बाबू में रंजीत और सिंपल कपाड़िया दोनों ही काम कर रहे थे। लेकिन राजेश खन्ना की वजह से इन दोनों के बीच काफी बहस हुई और आखिरकार रंजीत और सिंपल कपाड़िया एक-दूसरे से अलग हो गए।

कहा जाता है कि रंधीर कपूर और बबीता का तलाक होने के बाद रंजीत और बबीता भी रिलेशन में आए थे। हालांकि इस बात की पुष्टि कभी नहीं हो पाई।

शुद्ध शाकाहारी हैं रंजीत

भले ही फिल्मों में रंजीत एक बेहद बुरे इंसान के रोल में नज़र आते रहे। लेकिन असल ज़िंदगी में रंजीत एक शुद्ध शाकाहारी इंसान हैं। उन्होंने शराब तक को भी कभी मुंह से नहीं लगाया है। बीते दौर में ज़्यादातर महिलाएं रंजीत के नाम से भी खौफ खाती रहीं।

लेकिन कई महिलाएं ऐसी भी होती थी जो रंजीत की विलेनी पर ही अपना दिल हार बैठी थी। रंजीत को अक्सर महिलाओं के खत मिलते रहते थे जिनमें वे उनसे अपने प्रेम का इज़हार किया करती थी और शादी करने की बातें भी करती थी।

सदा सेहतमंद रहें रंजीत

रंजीत की उम्र अब 79 साल हो चुकी है। वो अब फिल्मों से पूरी तरह से रिटायर हो गए हैं। लेकिन रंजीत का जलवा आज भी बॉलीवुड में बरकरार है। लोग आज भी रंजीत की फिल्मों को बड़े ही शौक से देखते हैं। मॉडर्न कबूतर रंजीत की अच्छी सेहत के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है। और फिल्म इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिए उन्हें सैल्यूट करता है। जय हिंद।

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